अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पूँछे मातु मलिन मन देखी। लखन कही सब कथा बिसेषी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमाताने उदास मन देखकर उनसे [कारण] पूछा। लक्ष्मणजीने सब कथा विस्तारसे कह सुनायी। सुमित्राजी कठोर वचनोंको सुनकर ऐसी सहम गयीं जैसे हिरनी चारों ओर वनमें आग लगी देखकर सहम जाती है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 404 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पूँछे मातु मलिन मन देखी। लखन कही सब कथा बिसेषी।।
गई सहमि सुनि बचन कठोरा। मृगी देखि दव जनु चहु ओरा।।
स्रोत अभिलेख 2.73 · पुस्तक पृ. 403, 404
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पूँछे मातु मलिन मन देखी। लखन कही सब कथा बिसेषी।।
English explanation
Seeing his troubled state of mind, his mother asked, and Lakshmana related the whole matter in detail.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूँछे | पूछा | asked |
| मातु | माता सुमित्रा ने | his mother Sumitra |
| मलिन | उदास; व्यथित | sad; troubled |
| मन | मन | state of mind |
| देखी | देखकर | having seen |
| लखन | लक्ष्मण ने | Lakshmana |
| कही | बताई | related |
| सब | सारी | the whole |
| कथा | घटना; बात | account; matter |
| बिसेषी | विस्तार से | in detail |
2 गई सहमि सुनि बचन कठोरा। मृगी देखि दव जनु चहु ओरा।।
English explanation
Hearing the harsh words, Sumitra was frightened, like a doe seeing a forest fire on every side.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गई | हो गईं | became |
| सहमि | सहमकर; भयभीत | frightened |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बचन | वचन; बातें | words |
| कठोरा | कठोर; दुःखद | harsh; distressing |
| मृगी | हिरनी | a doe |
| देखि | देखकर | seeing |
| दव | वन की आग | forest fire |
| जनु | मानो | as though |
| चहु | चारों | all four |
| ओरा | ओर; दिशाओं में | sides; directions |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.73
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 404
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 403, 404
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