अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रेख खँचाइ कहउँ बलु भाषी। भामिनि भइहु दूध कइ माखी।।
मूल पाठ
रेख खँचाइ कहउँ बलु भाषी। भामिनि भइहु दूध कइ माखी।।
जौं सुत सहित करहु सेवकाई। तौ घर रहहु न आन उपाई।।
स्रोत अभिलेख 2.19 · पुस्तक पृ. 359, 359
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं यह बात लकीर खींचकर बलपूर्वक कहती हूँ, हे भामिनी! तुम तो अब दूधकी मक्खी हो गयी! (जैसे दूधमें पड़ी हुई मक्खीको लोग निकालकर फेंक देते हैं, वैसे ही तुम्हें भी लोग घरसे निकाल बाहर करेंगे) जो पुत्रसहित [कौसल्याकी] चाकरी बजाओगी तो घरमें रह सकोगी; [अन्यथा घरमें रहनेका] दूसरा उपाय नहीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 359 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रेख खँचाइ कहउँ बलु भाषी। भामिनि भइहु दूध कइ माखी।।
English explanation
I say with firm certainty, as though having a line drawn to seal my assertion: lady, you will become like a fly in milk, fit to be removed and discarded.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रेख | लकीर | a line |
| खँचाइ | खिंचवाकर | having it drawn |
| कहउँ | मैं कहती हूँ | I say |
| बलु | जोर; दृढ़ता | force; firmness |
| भाषी | कहकर; बोलकर | speaking; declaring |
| भामिनि | हे सुंदरी, कैकेयी | O lovely lady, Kaikeyi |
| भइहु | तुम हो जाओगी | you will become |
| दूध | दूध | milk |
| कइ | की | in; of |
| माखी | मक्खी | a fly |
2 जौं सुत सहित करहु सेवकाई। तौ घर रहहु न आन उपाई।।
English explanation
Only if you serve along with your son will you be able to remain in the household; there will be no other way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| सुत | पुत्र भरत | your son Bharata |
| सहित | के साथ | along with |
| करहु | तुम करो | you perform |
| सेवकाई | सेवक की सेवा | service as a servant |
| तौ | तो ही | only then |
| घर | घर में | in the household |
| रहहु | तुम रह सकोगी | you will remain |
| न | नहीं | no |
| आन | दूसरा | other |
| उपाई | उपाय | means; way |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 359
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 359, 359
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।