अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रिषि रुख लखि कह तेरहुतिराजू। इहाँ उचित नहिं असन अनाजू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दविश्वामित्रजीका रुख देखकर तिरहुतराज जनकजीने कहा—यहाँ अन्न खाना उचित नहीं है। राजाका सुन्दर कथन सबके मनको अच्छा लगा। सब आज्ञा पाकर नहाने चले॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 576 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रिषि रुख लखि कह तेरहुतिराजू। इहाँ उचित नहिं असन अनाजू।।
कहा भूप भल सबहि सोहाना। पाइ रजायसु चले नहाना।।
स्रोत अभिलेख 2.278 · पुस्तक पृ. 575, 576
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रिषि रुख लखि कह तेरहुतिराजू। इहाँ उचित नहिं असन अनाजू।।
English explanation
Understanding the sage’s intention, Janaka, king of Tirhut, said, “Eating grain here is not appropriate.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिषि | ऋषि विश्वामित्र का | of the sage Vishvamitra |
| रुख | अभिप्राय; इच्छा | intention; wish |
| लखि | समझकर | perceiving |
| कह | बोले | said |
| तेरहुतिराजू | तिरहुत अर्थात मिथिला के राजा जनक | Janaka, king of Tirhut or Mithila |
| इहाँ | यहाँ | here |
| उचित | उचित | appropriate |
| नहिं | नहीं | not |
| असन | खाना; भोजन करना | eating |
| अनाजू | अन्न; अनाज | grain |
2 कहा भूप भल सबहि सोहाना। पाइ रजायसु चले नहाना।।
English explanation
Everyone approved the king’s good suggestion. Receiving the royal permission, they went to bathe.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहा | कही हुई बात | what was said |
| भूप | राजा जनक की | by King Janaka |
| भल | अच्छी | good |
| सबहि | सबको | to everyone |
| सोहाना | पसंद आई | was pleasing |
| पाइ | पाकर | having received |
| रजायसु | राजा की आज्ञा | royal permission |
| चले | चले | went |
| नहाना | स्नान करने | to bathe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.278
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 576
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 575, 576
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