अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम सुना दुखु कान न काऊ। जीवनतरु जिमि जोगवइ राऊ।।
मूल पाठ
राम सुना दुखु कान न काऊ। जीवनतरु जिमि जोगवइ राऊ।।
पलक नयन फनि मनि जेहि भाँती। जोगवहिं जननि सकल दिन राती।।
स्रोत अभिलेख 2.201 · पुस्तक पृ. 510, 510
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीने कानोंसे भी कभी दु:खका नाम नहीं सुना। महाराज स्वयं जीवन-वृक्षकी तरह उनकी सार-सँभाल किया करते थे। सब माताएँ भी रात-दिन उनकी ऐसी सार-सँभाल करती थीं, जैसे पलक नेत्रोंकी और साँप अपनी मणिकी करते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 510 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम सुना दुखु कान न काऊ। जीवनतरु जिमि जोगवइ राऊ।।
English explanation
Rama had never even heard of any sorrow; the king tended him like the tree of his own life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम ने; दशरथ के पुत्र | Rama, Dasharatha’s son, as subject |
| सुना | सुना | heard |
| दुखु | दुःख | sorrow |
| कान | कानों से | with his ears |
| न | नहीं | not |
| काऊ | कोई भी; कभी भी | any at all; ever |
| जीवनतरु | जीवनरूपी वृक्ष | the tree of life |
| जिमि | जैसे | like |
| जोगवइ | सँभालते और रक्षा करते हैं | tends and protects |
| राऊ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
2 पलक नयन फनि मनि जेहि भाँती। जोगवहिं जननि सकल दिन राती।।
English explanation
As eyelids guard the eyes and a serpent guards its jewel, all his mothers cared for Rama day and night.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पलक | पलकें | eyelids |
| नयन | आँखों को | the eyes |
| फनि | सर्प | a serpent |
| मनि | अपनी मणि को | its jewel |
| जेहि | जिस | in which |
| भाँती | रीति से | manner |
| जोगवहिं | सँभालती और रक्षा करती हैं | care for and protect |
| जननि | माताएँ | mothers |
| सकल | सभी | all |
| दिन | दिन | day |
| राती | रात | night |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.201
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 510
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 510, 510
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