अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम सपथ सत कहुउँ सुभाऊ। राममातु कछु कहेउ न काऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरामकी सौ बार सौगंध खाकर मैं स्वभावसे ही कहता हूँ कि रामकी माता (कौसल्या)-ने [इस विषयमें] मुझसे कभी कुछ नहीं कहा। अवश्य ही मैंने तुमसे बिना पूछे यह सब किया। इसीसे मेरा मनोरथ खाली गया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 370 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम सपथ सत कहुउँ सुभाऊ। राममातु कछु कहेउ न काऊ।।
मैं सबु कीन्ह तोहि बिनु पूँछें। तेहि तें परेउ मनोरथु छूछें।।
स्रोत अभिलेख 2.32 · पुस्तक पृ. 370, 371
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम सपथ सत कहुउँ सुभाऊ। राममातु कछु कहेउ न काऊ।।
English explanation
I swear by Rama and speak the truth sincerely: Rama’s mother never said anything.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम की | by Rama |
| सपथ | शपथ | oath |
| सत | सत्य | the truth |
| कहुउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| सुभाऊ | सहज, निष्कपट भाव से | sincerely and naturally |
| राममातु | राम की माता कौसल्या ने | Rama’s mother, Kausalya |
| कछु | कुछ | anything |
| कहेउ | कहा | said |
| न | नहीं | not |
| काऊ | कभी | ever |
2 मैं सबु कीन्ह तोहि बिनु पूँछें। तेहि तें परेउ मनोरथु छूछें।।
English explanation
I did everything without asking you; because of that, my cherished wish came to nothing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैंने | I |
| सबु | सब कुछ | everything |
| कीन्ह | किया | did |
| तोहि | तुमसे | you |
| बिनु | बिना | without |
| पूँछें | पूछे | asking |
| तेहि | उसी बात | that very circumstance |
| तें | के कारण | because of |
| परेउ | रह गया | ended up |
| मनोरथु | मन की अभिलाषा | cherished wish |
| छूछें | खाली, निष्फल | empty, unfulfilled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 370
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 370, 371
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।