अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम संग सिय रहति सुखारी। पुर परिजन गृह सुरति बिसारी।।
मूल पाठ
राम संग सिय रहति सुखारी। पुर परिजन गृह सुरति बिसारी।।
छिनु छिनु पिय बिधु बदनु निहारी। प्रमुदित मनहुँ चकोरकुमारी।।
स्रोत अभिलेख 2.14 · पुस्तक पृ. 460, 460
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीके साथ सीताजी अयोध्यापुरी, कुटुम्बके लोग और घरकी याद भूलकर बहुत ही सुखी रहती हैं। क्षण-क्षणपर पति श्रीरामचन्द्रजीके चन्द्रमाके समान मुखको देखकर वे वैसे ही परम प्रसन्न रहती हैं जैसे चकोरकुमारी (चकोरी) चन्द्रमाको देखकर!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 460 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम संग सिय रहति सुखारी। पुर परिजन गृह सुरति बिसारी।।
English explanation
Sita lives happily with Rama, having forgotten the city, her relatives, and her home.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | Rama |
| संग | साथ | with |
| सिय | सीता | Sita |
| रहति | रहती हैं | lives |
| सुखारी | सुखी होकर | happily |
| पुर | नगर की | the city |
| परिजन | परिवारजनों की | relatives |
| गृह | घर की | home |
| सुरति | याद | memory |
| बिसारी | भुलाकर | having forgotten |
2 छिनु छिनु पिय बिधु बदनु निहारी। प्रमुदित मनहुँ चकोरकुमारी।।
English explanation
Moment after moment, gazing at her beloved Rama’s moonlike face, Sita rejoices as though she were a female chakora bird.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छिनु | क्षण | moment |
| छिनु | क्षण; हर क्षण | after moment; every moment |
| पिय | प्रिय पति का | her beloved husband’s |
| बिधु | चंद्रमा-जैसा | moonlike |
| बदनु | मुख | face |
| निहारी | देखकर | gazing upon |
| प्रमुदित | अत्यंत आनंदित | delighted |
| मनहुँ | मानो | as though |
| चकोरकुमारी | चकोरी पक्षी | a female chakora bird |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 460
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 460, 460
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।