अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम लखन सिय प्रीति सुहाई। बचन अगोचर किमि कहि जाई।।
मूल पाठ
राम लखन सिय प्रीति सुहाई। बचन अगोचर किमि कहि जाई।।
खग मृग मगन देखि छबि होहीं। लिए चोरि चित राम बटोहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.123 · पुस्तक पृ. 445, 446
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजी, लक्ष्मणजी और सीताजीकी सुन्दर प्रीति वाणीका विषय नहीं है (अर्थात् अनिर्वचनीय है), अत: वह कैसे कही जा सकती है? पक्षी और पशु भी उस छविको देखकर (प्रेमानन्दमें) मग्न हो जाते हैं। पथिकरूप श्रीरामचन्द्रजीने उनके भी चित्त चुरा लिये हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 446 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम लखन सिय प्रीति सुहाई। बचन अगोचर किमि कहि जाई।।
English explanation
The beautiful love among Rama, Lakshmana, and Sita is beyond words; how could it be expressed?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम | Rama |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana |
| सिय | सीता | Sita |
| प्रीति | परस्पर प्रेम | mutual love |
| सुहाई | सुंदर | beautiful |
| बचन | वाणी की | of speech |
| अगोचर | पहुँच से बाहर | beyond reach |
| किमि | कैसे | how |
| कहि | कहा | expressed |
| जाई | जा सकता है | could it be |
2 खग मृग मगन देखि छबि होहीं। लिए चोरि चित राम बटोहीं।।
English explanation
Birds and wild animals become absorbed on seeing their beauty; Rama, the traveler, has stolen their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खग | पक्षी | birds |
| मृग | हिरण और वन-पशु | deer and wild animals |
| मगन | मुग्ध और तल्लीन | enraptured |
| देखि | देखकर | on seeing |
| छबि | सुंदर छवि | their beauty |
| होहीं | हो जाते हैं | become |
| लिए | ले लिए हैं | has taken |
| चोरि | चुराकर | by stealing |
| चित | चित्त | their hearts |
| राम | राम ने | Rama |
| बटोहीं | पथिक रूप में | as a traveler |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.123
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 446
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 445, 446
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।