अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम मातु दुखु सुखु सम जानी। कहि गुन राम प्रबोधीं रानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीकी माता कौसल्याजीने दु:ख और सुखको समान जानकर श्रीरामजीके गुण कहकर दूसरी रानियोंको धैर्य बँधाया। कोई श्रीरामजीकी बड़ाई (बड़प्पन) की चर्चा कर रहे हैं, तो कोई भरतजीके अच्छेपनकी सराहना करते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 603 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम मातु दुखु सुखु सम जानी। कहि गुन राम प्रबोधीं रानी।।
एक कहहिं रघुबीर बड़ाई। एक सराहत भरत भलाई।।
स्रोत अभिलेख 2.309 · पुस्तक पृ. 602, 603
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम मातु दुखु सुखु सम जानी। कहि गुन राम प्रबोधीं रानी।।
English explanation
Rama’s mother Kausalya, regarding sorrow and happiness alike, consoled the queens by recounting Rama’s virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम की | Rama’s |
| मातु | माता कौसल्या | mother, Kausalya |
| दुखु | दुख | sorrow |
| सुखु | सुख | happiness |
| सम | समान | alike |
| जानी | समझकर | regarding |
| कहि | कहकर | by recounting |
| गुन | गुण | virtues |
| राम | राम के | Rama’s |
| प्रबोधीं | समझाया और सांत्वना दी | consoled and reassured |
| रानी | रानियों को | the queens |
2 एक कहहिं रघुबीर बड़ाई। एक सराहत भरत भलाई।।
English explanation
Some speak of Rama’s greatness, while others praise Bharata’s goodness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | कुछ लोग | some people |
| कहहिं | कहते हैं | speak of |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम की | Rama’s, the hero of Raghu’s lineage |
| बड़ाई | महानता | greatness |
| एक | कुछ अन्य लोग | others |
| सराहत | प्रशंसा करते हैं | praise |
| भरत | भरत की | Bharata’s |
| भलाई | भलाई | goodness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.309
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 603
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 602, 603
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।