अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मति अनुसार सराहन लागे। सचिव सभासद सब अनुरागे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमन्त्री और सभासद सभी प्रेममुग्ध होकर अपनी-अपनी बुद्धिके अनुसार सराहना करने लगे। श्रीरामचन्द्रजी और भरतजीका संवाद सुन-सुनकर दोनों समाजोंके हृदयोंमें हर्ष और विषाद (भरतजीके सेवाधर्मको देखकर हर्ष और रामवियोगकी सम्भावनासे विषाद) दोनों हुए॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 603 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मति अनुसार सराहन लागे। सचिव सभासद सब अनुरागे।।
सुनि सुनि राम भरत संबादू। दुहु समाज हियँ हरषु बिषादू।।
स्रोत अभिलेख 2.309 · पुस्तक पृ. 602, 603
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मति अनुसार सराहन लागे। सचिव सभासद सब अनुरागे।।
English explanation
Filled with affection, all the ministers and assembly members began praising according to their own understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मति | अपनी समझ के | their understanding |
| अनुसार | अनुसार | according to |
| सराहन | प्रशंसा करने | to praise |
| लागे | लगे | began |
| सचिव | मंत्री | ministers |
| सभासद | सभा के सदस्य | assembly members |
| सब | सभी | all |
| अनुरागे | प्रेम से भरे हुए | filled with affection |
2 सुनि सुनि राम भरत संबादू। दुहु समाज हियँ हरषु बिषादू।।
English explanation
As they listen to Rama and Bharata’s dialogue, both gatherings feel joy and sorrow in their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनते | listening |
| सुनि | सुनते हुए | again and again |
| राम | राम का | Rama’s |
| भरत | भरत का | Bharata’s |
| संबादू | संवाद | dialogue |
| दुहु | दोनों | both |
| समाज | समाजों के | gatherings’ |
| हियँ | हृदयों में | in the hearts |
| हरषु | हर्ष | joy |
| बिषादू | विषाद | sorrow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.309
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 603
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 602, 603
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।