अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम भरत गुन गनत सप्रीती। निसि दंपतिहि पलक सम बीती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजी और भरतजीके गुणोंकी प्रेमपूर्वक गणना करते (कहते-सुनते) पति-पत्नीको रात पलकके समान बीत गयी। प्रात:काल दोनों राजसमाज जागे और नहा-नहाकर देवताओंकी पूजा करने लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 586 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम भरत गुन गनत सप्रीती। निसि दंपतिहि पलक सम बीती।।
राज समाज प्रात जुग जागे। न्हाइ न्हाइ सुर पूजन लागे।।
स्रोत अभिलेख 2.29 · पुस्तक पृ. 586, 586
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम भरत गुन गनत सप्रीती। निसि दंपतिहि पलक सम बीती।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: Lovingly recounting Rama’s and Bharata’s virtues, King Janaka and his queen passed the night as though it were a mere blink.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | of Rama |
| भरत | भरत के | of Bharata |
| गुन | गुण | virtues |
| गनत | गिनते हुए | recounting |
| सप्रीती | प्रेमपूर्वक | with affection |
| निसि | रात | the night |
| दंपतिहि | दंपति के लिए | for the royal couple |
| पलक | पलक झपकने | a blink |
| सम | के समान | like |
| बीती | बीत गई | passed |
2 राज समाज प्रात जुग जागे। न्हाइ न्हाइ सुर पूजन लागे।।
English explanation
Both royal assemblies awoke in the morning, and, after bathing, their members began worshipping the gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राज | राजकीय | royal |
| समाज | समूह | assemblies |
| प्रात | सुबह | in the morning |
| जुग | दोनों | both |
| जागे | जाग गए | awoke |
| न्हाइ | स्नान करके | having bathed |
| न्हाइ | सभी अपने-अपने स्नान करके | each having bathed |
| सुर | देवताओं का | of the gods |
| पूजन | पूजन करने | worship |
| लागे | लग गए | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 586
- सहायक विषय
- जनक-सुनयना-संवाद, भरतजीकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 586, 586
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।