अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम बिरहँ तजि तनु छनभंगू। भूप सोच कर कवन प्रसंगू।।
मूल पाठ
राम बिरहँ तजि तनु छनभंगू। भूप सोच कर कवन प्रसंगू।।
राम लखन सिय बिनु पग पनहीं। करि मुनि बेष फिरहिं बन बनही।।
स्रोत अभिलेख 2.211 · पुस्तक पृ. 518, 519
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर जिन्होंने श्रीरामचन्द्रजीके विरहमें अपने क्षणभङ्गुर शरीरको त्याग दिया, ऐसे राजाके लिये सोच करनेका कौन प्रसंग है? [सोच इसी बातका है कि] श्रीरामजी, लक्ष्मणजी और सीताजी पैरोंमें बिना जूतीके मुनियोंका वेष बनाये वन-वनमें फिरते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 519 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम बिरहँ तजि तनु छनभंगू। भूप सोच कर कवन प्रसंगू।।
English explanation
He relinquished his fleeting body in separation from Rama; what reason is there to grieve for the king?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | from Rama |
| बिरहँ | वियोग में | in separation |
| तजि | त्यागकर | having relinquished |
| तनु | शरीर | the body |
| छनभंगू | क्षणभंगुर | fleeting; perishable |
| भूप | राजा दशरथ के लिए | for King Dasharatha |
| सोच | शोक | grief |
| कर | का | for |
| कवन | क्या | what |
| प्रसंगू | कारण; अवसर | reason; occasion |
2 राम लखन सिय बिनु पग पनहीं। करि मुनि बेष फिरहिं बन बनही।।
English explanation
Rama, Lakshmana, and Sita wander from forest to forest barefoot, dressed as ascetics.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम | Rama |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama's brother |
| सिय | सीता | Sita, Rama's wife |
| बिनु | बिना | without |
| पग | पैरों में | on their feet |
| पनहीं | जूते | footwear |
| करि | धारण करके | having adopted |
| मुनि | मुनियों का | of ascetics |
| बेष | वेश | dress |
| फिरहिं | घूमते हैं | wander |
| बन | वन से | from forest |
| बनही | वन में | to forest |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.211
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 519
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 518, 519
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