अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाहिन डरु बिगरिहि परलोकू। पितहु मरन कर मोहि न सोकू।।
मूल पाठ
नाहिन डरु बिगरिहि परलोकू। पितहु मरन कर मोहि न सोकू।।
सुकृत सुजस भरि भुअन सुहाए। लछिमन राम सरिस सुत पाए।।
स्रोत अभिलेख 2.211 · पुस्तक पृ. 518, 519
भावार्थ
मूल पाठ के बादन यही डर है कि मेरा परलोक बिगड़ जायगा और न पिताजीके मरनेका ही मुझे शोक है। क्योंकि उनका सुन्दर पुण्य और सुयश विश्वभरमें सुशोभित है। उन्होंने श्रीराम-लक्ष्मण-सरीखे पुत्र पाये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 519 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नाहिन डरु बिगरिहि परलोकू। पितहु मरन कर मोहि न सोकू।।
English explanation
I do not fear that my fate in the next world will be ruined; nor do I grieve even over my father's death.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाहिन | नहीं है | there is no |
| डरु | भय | fear |
| बिगरिहि | बिगड़ जाएगा | will be ruined |
| परलोकू | परलोक का कल्याण | well-being in the next world |
| पितहु | पिता के भी | even of my father |
| मरन | मरने | death |
| कर | का | over |
| मोहि | मुझे | to me |
| न | नहीं | not |
| सोकू | शोक | grief |
2 सुकृत सुजस भरि भुअन सुहाए। लछिमन राम सरिस सुत पाए।।
English explanation
My father's virtuous deeds and good renown shine throughout the world; he was blessed with sons like Lakshmana and Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुकृत | पुण्यकर्म | virtuous deeds |
| सुजस | सुंदर यश | good renown |
| भरि | भर में | throughout |
| भुअन | संसार | the world |
| सुहाए | शोभायमान हैं | shine splendidly |
| लछिमन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama's brother |
| राम | राम | Rama, Dasharatha's son |
| सरिस | जैसे | like |
| सुत | पुत्र | sons |
| पाए | प्राप्त किए | obtained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.211
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 519
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 518, 519
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।