अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम बियोग बिकल सब ठाढ़े। जहँ तहँ मनहुँ चित्र लिखि काढ़े।।
मूल पाठ
राम बियोग बिकल सब ठाढ़े। जहँ तहँ मनहुँ चित्र लिखि काढ़े।।
नगरु सफल बनु गहबर भारी। खग मृग बिपुल सकल नर नारी।।
स्रोत अभिलेख 2.84 · पुस्तक पृ. 412, 413
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीके वियोगमें सभी व्याकुल हुए जहाँ-तहाँ [ऐसे चुपचाप स्थिर होकर] खड़े हैं, मानो तसवीरोंमें लिखकर बनाये हुए हैं। नगर मानो फलोंसे परिपूर्ण बड़ा भारी सघन वन था। नगरनिवासी सब स्त्री-पुरुष बहुत-से पशु-पक्षी थे। (अर्थात् अवधपुरी अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों फलोंको देनेवाली नगरी थी और सब स्त्री-पुरुष सुखसे उन फलोंको प्राप्त करते थे।)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 412 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम बियोग बिकल सब ठाढ़े। जहँ तहँ मनहुँ चित्र लिखि काढ़े।।
English explanation
Distraught at separation from Rama, everyone stands here and there, as though painted into a picture.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम से | from Rama |
| बियोग | वियोग में | in separation |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| सब | सभी | everyone |
| ठाढ़े | खड़े हैं | stand |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| तहँ | वहाँ | there |
| मनहुँ | मानो | as though |
| चित्र | चित्र | a picture |
| लिखि | अंकित करके | having drawn |
| काढ़े | चित्रित कर दिए गए | rendered in paint |
2 नगरु सफल बनु गहबर भारी। खग मृग बिपुल सकल नर नारी।।
English explanation
The whole city is like a vast, dense forest; all its men and women are its countless birds and beasts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नगरु | नगर | the city |
| सफल | पूरा (पाठ संदिग्ध) | entire (reading uncertain) |
| बनु | वन | a forest |
| गहबर | घना और दुर्गम | dense and hard to traverse |
| भारी | विशाल | vast |
| खग | पक्षी | birds |
| मृग | वन्य पशु | wild beasts |
| बिपुल | असंख्य | countless |
| सकल | सभी | all |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.84
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 412
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 412, 413
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।