अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम बचन गुरु नृपहि सुनाए। सील सनेह सुभायँ सुहाए।।
मूल पाठ
राम बचन गुरु नृपहि सुनाए। सील सनेह सुभायँ सुहाए।।
महाराज अब कीजिअ सोई। सब कर धरम सहित हित होई।।
स्रोत अभिलेख 2.291 · पुस्तक पृ. 587, 587
भावार्थ
मूल पाठ के बादगुरुजीने श्रीरामचन्द्रजीके शील और स्नेहसे युक्त स्वभावसे ही सुन्दर वचन राजा जनकजीको सुनाये [और कहा—] हे महाराज! अब वही कीजिये जिसमें सबका धर्मसहित हित हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 587 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम बचन गुरु नृपहि सुनाए। सील सनेह सुभायँ सुहाए।।
English explanation
The preceptor Vasishtha related Rama’s words to King Janaka—words made lovely by courtesy, affection, and natural goodness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम के | Rama’s |
| बचन | वचन | words |
| गुरु | गुरु वसिष्ठ ने | the preceptor Vasishtha |
| नृपहि | राजा जनक को | to King Janaka |
| सुनाए | सुनाए | related |
| सील | शील; विनय | courtesy; humility |
| सनेह | स्नेह | affection |
| सुभायँ | सहज सद्भाव से | through natural goodness |
| सुहाए | सुंदर लगे | were lovely |
2 महाराज अब कीजिअ सोई। सब कर धरम सहित हित होई।।
English explanation
Your Majesty, now do what will benefit everyone in accordance with duty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महाराज | हे महाराज जनक | Your Majesty, Janaka |
| अब | अब | now |
| कीजिअ | कीजिए | please do |
| सोई | वही | that very thing |
| सब | सब | everyone |
| कर | का | of |
| धरम | धर्म | duty; righteousness |
| सहित | के साथ; के अनुरूप | in accordance with |
| हित | हित | benefit |
| होई | हो | may come about |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.291
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 587
- सहायक विषय
- जनक-वसिष्ठादि-संवाद, इन्द्रकी चिन्ता, सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 587, 587
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