अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आपु आश्रमहि धारिअ पाऊ। भयउ सनेह सिथिल मुनिराऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअत: आप आश्रमको पधारिये। इतना कह मुनिराज स्नेहसे शिथिल हो गये। तब श्रीरामजी प्रणाम करके चले गये और ऋषि वसिष्ठजी धीरज धरकर जनकजीके पास आये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 587 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आपु आश्रमहि धारिअ पाऊ। भयउ सनेह सिथिल मुनिराऊ।।
करि प्रनाम तब रामु सिधाए। रिषि धरि धीर जनक पहिं आए।।
स्रोत अभिलेख 2.291 · पुस्तक पृ. 587, 587
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 आपु आश्रमहि धारिअ पाऊ। भयउ सनेह सिथिल मुनिराऊ।।
English explanation
Please enter the hermitage. The chief sage became overcome with affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आपु | आप | you |
| आश्रमहि | आश्रम में | into the hermitage |
| धारिअ | रखिए | please place |
| पाऊ | चरण | your foot |
| भयउ | हो गए | became |
| सनेह | स्नेह से | with affection |
| सिथिल | शिथिल; भाव-विह्वल | overcome; weakened |
| मुनिराऊ | मुनिराज वसिष्ठ | Vasishtha, the chief sage |
2 करि प्रनाम तब रामु सिधाए। रिषि धरि धीर जनक पहिं आए।।
English explanation
Then Rama bowed and departed. The sage Vasishtha regained composure and came to Janaka.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having made |
| प्रनाम | प्रणाम | a respectful bow |
| तब | तब | then |
| रामु | श्रीराम | Rama |
| सिधाए | चले गए | departed |
| रिषि | ऋषि वसिष्ठ | the sage Vasishtha |
| धरि | धारण करके | having regained |
| धीर | धैर्य | composure |
| जनक | राजा जनक के | King Janaka |
| पहिं | पास | to |
| आए | आए | came |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.291
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 587
- सहायक विषय
- जनक-वसिष्ठादि-संवाद, इन्द्रकी चिन्ता, सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 587, 587
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