अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रामु लखनु सिय बनहि सिधाए। गइउँ न संग न प्रान पठाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीराम, लक्ष्मण और सीता वनको चले गये। मैं न तो साथ ही गयी और न मैंने अपने प्राण ही उनके साथ भेजे। यह सब इन्हीं आँखोंके सामने हुआ। तो भी अभागे जीवने शरीर नहीं छोड़ा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 481 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रामु लखनु सिय बनहि सिधाए। गइउँ न संग न प्रान पठाए।।
यहु सबु भा इन्ह आँखिन्ह आगें। तउ न तजा तनु जीव अभागें।।
स्रोत अभिलेख 2.166 · पुस्तक पृ. 481, 481
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रामु लखनु सिय बनहि सिधाए। गइउँ न संग न प्रान पठाए।।
English explanation
Rama, Lakshmana, and Sita departed for the forest. I neither went with them nor sent my life after them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | राम | Rama |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana |
| सिय | सीता | Sita |
| बनहि | वन को | to the forest |
| सिधाए | चले गए | departed |
| गइउँ | मैं गई | I went |
| न | नहीं | not |
| संग | साथ | with them |
| न | न ही | nor |
| प्रान | प्राण; जीवन | life; vital breath |
| पठाए | भेजे | sent after them |
2 यहु सबु भा इन्ह आँखिन्ह आगें। तउ न तजा तनु जीव अभागें।।
English explanation
All this happened before these very eyes, yet this unfortunate soul did not leave the body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यहु | यह | this |
| सबु | सब | all |
| भा | हुआ | happened |
| इन्ह | इन | these |
| आँखिन्ह | आँखों के | eyes |
| आगें | सामने | before; in front of |
| तउ | फिर भी | even so; yet |
| न | नहीं | not |
| तजा | त्यागा; छोड़ा | abandoned; left |
| तनु | शरीर | the body |
| जीव | जीव ने; आत्मा ने | the soul |
| अभागें | अभागे ने | unfortunate |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.166
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 481
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 481, 481
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।