अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रामहि रायँ कहेउ बन जाना। कीन्ह आपु प्रिय प्रेम प्रवाना।।
मूल पाठ
रामहि रायँ कहेउ बन जाना। कीन्ह आपु प्रिय प्रेम प्रवाना।।
हम अब बन तें बनहि पठाई। प्रमुदित फिरब बिबेक बड़ाई।।
स्रोत अभिलेख 2.292 · पुस्तक पृ. 587, 588
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजा दशरथजीने श्रीरामजीको वन जानेके लिये कहा और स्वयं अपने प्रियके प्रेमको प्रमाणित (सच्चा) कर दिया (प्रियवियोगमें प्राण त्याग दिये)। परन्तु हम अब इन्हें वनसे [और गहन] वनको भेजकर अपने विवेककी बड़ाईमें आनन्दित होते हुए लौटेंगे [कि हमें जरा भी मोह नहीं है; हम श्रीरामजीको वनमें छोड़कर चले आये, दशरथजीकी तरह मरे नहंीं!]॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 587 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रामहि रायँ कहेउ बन जाना। कीन्ह आपु प्रिय प्रेम प्रवाना।।
English explanation
King Dasharatha told Rama to go to the forest and proved his own love for his beloved Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | राम को | to Rama |
| रायँ | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| कहेउ | कहा | told |
| बन | वन में | to the forest |
| जाना | जाने को | to go |
| कीन्ह | किया | made |
| आपु | अपना | his own |
| प्रिय | प्रिय राम के प्रति | for his beloved Rama |
| प्रेम | प्रेम | love |
| प्रवाना | प्रमाणित | proven |
2 हम अब बन तें बनहि पठाई। प्रमुदित फिरब बिबेक बड़ाई।।
English explanation
And now we shall send Rama from the forest back into the forest and return delighted, taking pride in our discernment!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हम | हम | we |
| अब | अब | now |
| बन | वन | the forest |
| तें | से | from |
| बनहि | वन ही में | into the forest itself |
| पठाई | भेजकर | having sent |
| प्रमुदित | प्रसन्न होकर | delighted |
| फिरब | लौटेंगे | shall return |
| बिबेक | विवेक की | of our discernment |
| बड़ाई | बड़ाई मानकर | taking pride in its greatness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.292
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 587
- सहायक विषय
- जनक-वसिष्ठादि-संवाद, इन्द्रकी चिन्ता, सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 587, 588
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।