अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तापस मुनि महिसुर सुनि देखी। भए प्रेम बस बिकल बिसेषी।।
मूल पाठ
तापस मुनि महिसुर सुनि देखी। भए प्रेम बस बिकल बिसेषी।।
समउ समुझि धरि धीरजु राजा। चले भरत पहिं सहित समाजा।।
स्रोत अभिलेख 2.292 · पुस्तक पृ. 587, 588
भावार्थ
मूल पाठ के बादतपस्वी, मुनि और ब्राह्मण यह सब सुन और देखकर प्रेमवश बहुत ही व्याकुल हो गये। समयका विचार करके राजा जनकजी धीरज धरकर समाजसहित भरतजीके पास चले॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 588 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तापस मुनि महिसुर सुनि देखी। भए प्रेम बस बिकल बिसेषी।।
English explanation
The ascetics, sages, and Brahmins, hearing and seeing this, became deeply distraught under the sway of love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तापस | तपस्वी | ascetics |
| मुनि | मुनि | sages |
| महिसुर | ब्राह्मण | Brahmins |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| देखी | देखकर | having seen |
| भए | हो गए | became |
| प्रेम | प्रेम के | of love |
| बस | वश में | under the sway |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| बिसेषी | अत्यंत | especially; deeply |
2 समउ समुझि धरि धीरजु राजा। चले भरत पहिं सहित समाजा।।
English explanation
Understanding the circumstances and gathering composure, King Janaka went to Bharata with his company.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समउ | समय की परिस्थिति | the circumstances of the moment |
| समुझि | समझकर | understanding |
| धरि | धारण करके | having mustered |
| धीरजु | धैर्य | composure |
| राजा | राजा जनक | King Janaka |
| चले | चले | went |
| भरत | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| पहिं | के पास | to |
| सहित | सहित | together with |
| समाजा | साथियों के समूह | his company |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.292
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 588
- सहायक विषय
- जनक-वसिष्ठादि-संवाद, इन्द्रकी चिन्ता, सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 587, 588
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।