अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रामहि केवल प्रेमु पिआरा। जानि लेउ जो जाननिहारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीको केवल प्रेम प्यारा है; जो जाननेवाला हो (जानना चाहता हो), वह जान ले। तब श्रीरामचन्द्रजीने प्रेमसे परिपुष्ट हुए (प्रेमपूर्ण) कोमल वचन कहकर उन सब वनमें विचरण करनेवाले लोगोंको संतुष्ट किया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 457 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रामहि केवल प्रेमु पिआरा। जानि लेउ जो जाननिहारा।।
राम सकल बनचर तब तोषे। कहि मृदु बचन प्रेम परिपोषे।।
स्रोत अभिलेख 2.137 · पुस्तक पृ. 457, 458
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रामहि केवल प्रेमु पिआरा। जानि लेउ जो जाननिहारा।।
English explanation
AI draft: Love alone is dear to Rama. Whoever seeks to understand should understand this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | राम को | to Rama |
| केवल | केवल | only |
| प्रेमु | प्रेम | love |
| पिआरा | प्रिय है | is dear |
| जानि | जान | understand |
| लेउ | लो | take to heart |
| जो | जो कोई | whoever |
| जाननिहारा | जानने वाला है | is one who understands |
2 राम सकल बनचर तब तोषे। कहि मृदु बचन प्रेम परिपोषे।।
English explanation
Rama then pleased all the forest dwellers and nurtured their love by speaking gentle words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम ने | Rama |
| सकल | सभी | all |
| बनचर | वन में रहने वालों को | forest dwellers |
| तब | तब | then |
| तोषे | संतुष्ट किया | pleased |
| कहि | कहकर | by speaking |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बचन | वचन | words |
| प्रेम | प्रेम को | love |
| परिपोषे | पुष्ट किया | nurtured |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.137
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 457
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 457, 458
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।