अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रानि कुचालि सुनत नरपालहि। सूझ न कछु जस मनि बिनु ब्यालहि।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरानीकी कुचाल सुनकर राजा जनकजीको कुछ सूझ न पड़ा, जैसे मणिके बिना साँपको नहीं सूझता। फिर भरतजीको राज्य और श्रीरामचन्द्रजीको वनवास सुनकर मिथिलेश्वर जनकजीके हृदयमें बड़ा दु:ख हुआ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 569 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रानि कुचालि सुनत नरपालहि। सूझ न कछु जस मनि बिनु ब्यालहि।।
भरत राज रघुबर बनबासू। भा मिथिलेसहि हृदयँ हराँसू।।
स्रोत अभिलेख 2.271 · पुस्तक पृ. 569, 570
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रानि कुचालि सुनत नरपालहि। सूझ न कछु जस मनि बिनु ब्यालहि।।
English explanation
Hearing of Queen Kaikeyi’s intrigue, King Janaka could think of nothing, like a serpent bereft of its jewel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रानि | रानी कैकेयी की | of Queen Kaikeyi |
| कुचालि | कुटिल चाल | devious intrigue |
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| नरपालहि | राजा जनक को | to King Janaka |
| सूझ | सूझा | occurred to the mind |
| न | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | anything |
| जस | जैसे | just as |
| मनि | मणि | jewel |
| बिनु | के बिना | without |
| ब्यालहि | साँप को | to a serpent |
2 भरत राज रघुबर बनबासू। भा मिथिलेसहि हृदयँ हराँसू।।
English explanation
Bharata receiving the kingdom and Rama being exiled brought deep anguish to Janaka, king of Mithila.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत को | for Bharata |
| राज | राज्य | the kingdom |
| रघुबर | रघुवंशश्रेष्ठ राम को | for Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| बनबासू | वनवास | forest exile |
| भा | हुआ | arose |
| मिथिलेसहि | मिथिला के राजा जनक को | to Janaka, king of Mithila |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| हराँसू | गहरा संताप | deep anguish |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.271
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 569
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 569, 570
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।