अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नृप बूझे बुध सचिव समाजू। कहहु बिचारि उचित का आजू।।
मूल पाठ
नृप बूझे बुध सचिव समाजू। कहहु बिचारि उचित का आजू।।
समुझि अवध असमंजस दोऊ। चलिअ कि रहिअ न कह कछु कोऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.271 · पुस्तक पृ. 569, 570
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाने विद्वानों और मन्त्रियोंके समाजसे पूछा कि विचारकर कहिये, आज (इस समय) क्या करना उचित है? अयोध्याकी दशा समझकर और दोनों प्रकारसे असमंजस जानकर 'चलिये या रहिये? किसीने कुछ नहीं कहा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 570 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नृप बूझे बुध सचिव समाजू। कहहु बिचारि उचित का आजू।।
English explanation
The king asked the assembly of wise ministers, ‘Consider and tell me: what is proper to do now?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृप | राजा जनक ने | King Janaka |
| बूझे | पूछा | asked |
| बुध | बुद्धिमान | wise |
| सचिव | मंत्रियों की | of ministers |
| समाजू | सभा से | the assembly |
| कहहु | बताइए | tell me |
| बिचारि | विचार करके | after considering |
| उचित | उचित है | is proper |
| का | क्या | what |
| आजू | आज; इस समय | today; now |
2 समुझि अवध असमंजस दोऊ। चलिअ कि रहिअ न कह कछु कोऊ।।
English explanation
Considering Ayodhya’s situation, there was uncertainty about both choices—whether to go or stay. No one offered an answer.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझि | समझकर | having considered |
| अवध | अयोध्या की स्थिति | Ayodhya’s situation |
| असमंजस | दुविधा | uncertainty |
| दोऊ | दोनों विकल्पों में | about both alternatives |
| चलिअ | चला जाए | should we go |
| कि | या | or |
| रहिअ | रहा जाए | should we stay |
| न | नहीं | not |
| कह | कहता | says |
| कछु | कुछ | anything |
| कोऊ | कोई | anyone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.271
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 570
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 569, 570
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।