अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नृपहि धीर धरि हृदयँ बिचारी। पठए अवध चतुर चर चारी।।
मूल पाठ
नृपहि धीर धरि हृदयँ बिचारी। पठए अवध चतुर चर चारी।।
बूझि भरत सति भाउ कुभाऊ। आएहु बेगि न होइ लखाऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.271 · पुस्तक पृ. 569, 570
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[जब किसीने कोई सम्मति नहीं दी] तब राजाने धीरज धर हृदयमें विचारकर चार चतुर गुप्तचर (जासूस) अयोध्याको भेजे [और उनसे कह दिया कि] तुमलोग [श्रीरामजीके प्रति] भरतजीके सद्भाव (अच्छे भाव, प्रेम) या दुर्भाव (बुरा भाव, विरोध) का [यथार्थ] पता लगाकर जल्दी लौट आना, किसीको तुम्हारा पता न लगने पावे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 570 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नृपहि धीर धरि हृदयँ बिचारी। पठए अवध चतुर चर चारी।।
English explanation
The king composed himself, reflected inwardly, and sent four clever spies to Ayodhya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृपहि | राजा जनक ने | King Janaka |
| धीर | धैर्य | composure |
| धरि | धारण करके | having maintained |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| बिचारी | विचार करके | having reflected |
| पठए | भेजे | sent |
| अवध | अयोध्या को | to Ayodhya |
| चतुर | चतुर | clever |
| चर | गुप्तचर | spies |
| चारी | चार | four |
2 बूझि भरत सति भाउ कुभाऊ। आएहु बेगि न होइ लखाऊ।।
English explanation
‘Ascertain Bharata’s true disposition—whether good or ill—and return quickly without being detected.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बूझि | जानकर | having ascertained |
| भरत | भरत का | Bharata’s |
| सति | सच्चा; वास्तविक | true; actual |
| भाउ | सद्भाव | good intent |
| कुभाऊ | दुर्भाव | ill intent |
| आएहु | लौट आना | return |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| न | नहीं | not |
| होइ | होना | become |
| लखाऊ | पहचान में आए हुए | detected |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.271
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 570
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 569, 570
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