अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रघुकुलतिलक जोरि दोउ हाथा। मुदित मातु पद नायउ माथा।।
मूल पाठ
रघुकुलतिलक जोरि दोउ हाथा। मुदित मातु पद नायउ माथा।।
दीन्हि असीस लाइ उर लीन्हे। भूषन बसन निछावरि कीन्हे।।
स्रोत अभिलेख 2.52 · पुस्तक पृ. 387, 387
भावार्थ
मूल पाठ के बादरघुकुलतिलक श्रीरामचन्द्रजीने दोनों हाथ जोड़कर आनन्दके साथ माताके चरणोंमें सिर नवाया। माताने आशीर्वाद दिया, अपने हृदयसे लगा लिया और उनपर गहने तथा कपड़े न्यौछावर किये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 387 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रघुकुलतिलक जोरि दोउ हाथा। मुदित मातु पद नायउ माथा।।
English explanation
Rama, the glory of Raghu’s lineage, joined both hands and joyfully bowed his head at his mother’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुकुलतिलक | रघुकुल के गौरव श्रीराम | Rama, the glory of Raghu’s lineage |
| जोरि | जोड़कर | having joined |
| दोउ | दोनों | both |
| हाथा | हाथ | hands |
| मुदित | प्रसन्न होकर | joyfully |
| मातु | माता के | his mother’s |
| पद | चरणों में | at the feet |
| नायउ | झुकाया | bowed |
| माथा | सिर | his head |
2 दीन्हि असीस लाइ उर लीन्हे। भूषन बसन निछावरि कीन्हे।।
English explanation
His mother blessed him, embraced him, and offered ornaments and garments in loving celebration.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दीन्हि | दिया | gave |
| असीस | आशीर्वाद | a blessing |
| लाइ | लगाकर | drawing close to |
| उर | हृदय से | her heart |
| लीन्हे | ले लिया | took him into her embrace |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| बसन | वस्त्र | garments |
| निछावरि | न्योछावर | as celebratory offerings |
| कीन्हे | किए | made |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.52
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 387
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 387, 387
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