अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बार बार मुख चुंबति माता। नयन नेह जलु पुलकित गाता।।
मूल पाठ
बार बार मुख चुंबति माता। नयन नेह जलु पुलकित गाता।।
गोद राखि पुनि हृदयँ लगाए। स्त्रवत प्रेनरस पयद सुहाए।।
स्रोत अभिलेख 2.52 · पुस्तक पृ. 387, 387
भावार्थ
मूल पाठ के बादमाता बार-बार श्रीरामचन्द्रजीका मुख चूम रही हैं। नेत्रोंमें प्रेमका जल भर आया है और सब अङ्ग पुलकित हो गये हैं। श्रीरामको अपनी गोदमें बैठाकर फिर हृदयसे लगा लिया। सुन्दर स्तन प्रेमरस (दूध) बहाने लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 387 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बार बार मुख चुंबति माता। नयन नेह जलु पुलकित गाता।।
English explanation
The mother repeatedly kisses his face; her eyes fill with tears of affection and her body thrills with joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार; बार-बार | after time; repeatedly |
| मुख | मुख को | his face |
| चुंबति | चूमती हैं | kisses |
| माता | माता | the mother |
| नयन | नेत्रों में | in her eyes |
| नेह | स्नेह का | of affection |
| जलु | जल; आँसू | water; tears |
| पुलकित | रोमांचित | thrilled, with hair standing on end |
| गाता | शरीर | her body |
2 गोद राखि पुनि हृदयँ लगाए। स्त्रवत प्रेनरस पयद सुहाए।।
English explanation
Placing him in her lap, the mother again holds him to her heart; milk imbued with loving emotion flows sweetly. The wording of the latter part is somewhat uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गोद | गोद में | in her lap |
| राखि | रखकर | having placed him |
| पुनि | फिर | again |
| हृदयँ | हृदय से | to her heart |
| लगाए | लगाया | held him close |
| स्त्रवत | झरता हुआ | flowing |
| प्रेनरस | प्रेम का रस | the essence of love |
| पयद | दूध | milk |
| सुहाए | सुंदर; मनोहर | lovely; pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.52
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 387
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 387, 387
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।