अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
यह बड़ दोषु दूरि करि स्वामी। तजि सकोच सिखइअ अनुगामी।।
मूल पाठ
यह बड़ दोषु दूरि करि स्वामी। तजि सकोच सिखइअ अनुगामी।।
भरत बिनय सुनि सबहिं प्रसंसी। खीर नीर बिबरन गति हंसी।।
स्रोत अभिलेख 2.314 · पुस्तक पृ. 606, 607
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे स्वामी! इस बड़े दोषको दूर करके संकोच त्यागकर मुझ सेवकको शिक्षा दीजिये। दूध और जलको अलग-अलग करनेमें हंसिनीकी-सी गतिवाली भरतजीकी विनती सुनकर उसकी सभीने प्रशंसा की॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 607 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 यह बड़ दोषु दूरि करि स्वामी। तजि सकोच सिखइअ अनुगामी।।
English explanation
Lord, remove this great fault, and without hesitation instruct your follower.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| बड़ | बड़ा | great |
| दोषु | दोष | fault |
| दूरि | दूर | away |
| करि | कीजिए | please make |
| स्वामी | हे स्वामी | O lord |
| तजि | छोड़कर | setting aside |
| सकोच | संकोच | hesitation |
| सिखइअ | शिक्षा दीजिए | please instruct |
| अनुगामी | अपने अनुयायी को | your follower |
2 भरत बिनय सुनि सबहिं प्रसंसी। खीर नीर बिबरन गति हंसी।।
English explanation
Hearing Bharata's plea, everyone praised him; his discernment resembled the swan's proverbial ability to separate milk from water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | राम के भाई भरत की | of Bharata, Rama's brother |
| बिनय | विनम्र विनती | humble plea |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सबहिं | सबने | everyone |
| प्रसंसी | प्रशंसा की | praised |
| खीर | दूध | milk |
| नीर | पानी | water |
| बिबरन | अलग करना, भेद करना | separating, distinguishing |
| गति | रीति, विवेक की चाल | manner of discernment |
| हंसी | हंस की | of a swan |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.314
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 607
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद,पादुका-प्रदान, भरतजीकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 606, 607
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।