अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मोहि कुमातु समेत बिहाई। कहहु कहिहि के कीन्ह भलाई।।
मूल पाठ
मोहि कुमातु समेत बिहाई। कहहु कहिहि के कीन्ह भलाई।।
मो बिनु को सचराचर माहीं। जेहि सिय रामु प्रानप्रिय नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.181 · पुस्तक पृ. 493, 494
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेरी कुमाता कैकेयीसमेत मुझे छोड़कर, कहिये, और कौन कहेगा कि यह काम अच्छा किया गया? जड़-चेतन जगत्में मेरे सिवा और कौन है जिसको श्रीसीतारामजी प्राणोंके समान प्यारे न हों॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 493 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मोहि कुमातु समेत बिहाई। कहहु कहिहि के कीन्ह भलाई।।
English explanation
Apart from me and my wicked mother, tell me, who would say that any good has been done?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मुझे | me |
| कुमातु | बुरी माता, कैकेयी | wicked mother, Kaikeyi |
| समेत | सहित | together with |
| बिहाई | छोड़कर | excluding; apart from |
| कहहु | बताइए | tell me |
| कहिहि | कहेगा | would say |
| के | कौन | who |
| कीन्ह | की गई; हुई | was done |
| भलाई | भलाई | good; benefit |
2 मो बिनु को सचराचर माहीं। जेहि सिय रामु प्रानप्रिय नाहीं।।
English explanation
Apart from me, who in this world of moving and unmoving beings does not hold Sita and Rama dear as life itself?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मो | मुझे; मेरे | me |
| बिनु | छोड़कर | except; apart from |
| को | कौन | who |
| सचराचर | चर और अचर समस्त जगत | all moving and unmoving creation |
| माहीं | में | within |
| जेहि | जिसे | to whom |
| सिय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| रामु | राम | Rama |
| प्रानप्रिय | प्राणों के समान प्रिय | dear as life itself |
| नाहीं | नहीं हैं | are not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.181
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 493
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 493, 494
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