अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परम हानि सब कहँ बड़ लाहू। अदिनु मोर नहि दूषन काहू।।
मूल पाठ
परम हानि सब कहँ बड़ लाहू। अदिनु मोर नहि दूषन काहू।।
संसय सील प्रेम बस अहहू। सबुइ उचित सब जो कछु कहहू।।
स्रोत अभिलेख 2.181 · पुस्तक पृ. 493, 494
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो परम हानि है, उसीमें सबको बड़ा लाभ दीख रहा है। मेरा बुरा दिन है किसीका दोष नहीं। आप सब जो कुछ कहते हैं सो सब उचित ही है। क्योंकि आप लोग संशय, शील और प्रेमके वश हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 494 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 परम हानि सब कहँ बड़ लाहू। अदिनु मोर नहि दूषन काहू।।
English explanation
What is a grievous loss seems a great gain to everyone; this is my misfortune, not anyone else’s fault.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | अत्यंत बड़ी | supreme; grievous |
| हानि | हानि | loss |
| सब | सब | everyone |
| कहँ | को | to |
| बड़ | बड़ा | great |
| लाहू | लाभ | gain |
| अदिनु | बुरा समय; दुर्भाग्य | ill fortune; unlucky time |
| मोर | मेरा | my |
| नहि | नहीं | not |
| दूषन | दोष | fault; blame |
| काहू | किसी का | anyone’s |
2 संसय सील प्रेम बस अहहू। सबुइ उचित सब जो कछु कहहू।।
English explanation
You are moved by hesitation, courtesy, and affection; whatever you all say is entirely fitting.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संसय | संशय; संकोच | doubt; hesitation |
| सील | शील; विनय | courtesy; gentle propriety |
| प्रेम | प्रेम | affection |
| बस | वश में | under the influence of |
| अहहू | आप हैं | you are |
| सबुइ | सब ही | all of it indeed |
| उचित | उचित | fitting; proper |
| सब | आप सब | all of you |
| जो | जो | whatever |
| कछु | कुछ | anything |
| कहहू | कहते हैं | say |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.181
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 494
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 493, 494
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।