अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मोर तुम्हार परम पुरुषारथु। स्वारथु सुजसु धरमु परमारथु।।
मूल पाठ
मोर तुम्हार परम पुरुषारथु। स्वारथु सुजसु धरमु परमारथु।।
पितु आयसु पालिहिं दुहु भाई। लोक बेद भल भूप भलाई।।
स्रोत अभिलेख 2.315 · पुस्तक पृ. 607, 608
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेरा और तुम्हारा तो परम पुरुषार्थ, स्वार्थ, सुयश, धर्म और परमार्थ इसीमें है कि हम दोनों भाई पिताजीकी आज्ञाका पालन करें। राजाकी भलाई (उनके व्रतकी रक्षा) से ही लोक और वेद दोनोंमें भला है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 607 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मोर तुम्हार परम पुरुषारथु। स्वारथु सुजसु धरमु परमारथु।।
English explanation
My and your highest endeavor, personal welfare, good renown, duty, and ultimate good all lie in our two brothers obeying our father's command.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोर | मेरा | my |
| तुम्हार | तुम्हारा | your |
| परम | सर्वोच्च | highest |
| पुरुषारथु | पुरुषार्थ; जीवन का साध्य | endeavor; life's worthy aim |
| स्वारथु | अपना हित | personal welfare |
| सुजसु | सुयश | good renown |
| धरमु | धर्म; कर्तव्य | righteous duty |
| परमारथु | परम हित | ultimate good |
2 पितु आयसु पालिहिं दुहु भाई। लोक बेद भल भूप भलाई।।
English explanation
We two brothers shall obey our father's command; this is right according to worldly custom and the Vedas, and serves the king's welfare.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पितु | पिता की | father's |
| आयसु | आज्ञा | command |
| पालिहिं | पालन करेंगे | shall obey |
| दुहु | दोनों | both |
| भाई | भाई | brothers |
| लोक | लोकाचार में | in worldly custom |
| बेद | वेद के अनुसार | according to the Vedas |
| भल | उचित; अच्छा | right; good |
| भूप | राजा की | the king's |
| भलाई | भलाई | welfare |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.315
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 607
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद,पादुका-प्रदान, भरतजीकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 607, 608
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।