अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुर पितु मातु स्वामि सिख पालें। चलेहुँ कुमग पग परहिं न खालें।।
मूल पाठ
गुर पितु मातु स्वामि सिख पालें। चलेहुँ कुमग पग परहिं न खालें।।
अस बिचारि सब सोच बिहाई। पालहु अवध अवधि भरि जाई।।
स्रोत अभिलेख 2.315 · पुस्तक पृ. 607, 608
भावार्थ
मूल पाठ के बादगुरु, पिता, माता और स्वामीकी शिक्षा (आज्ञा) का पालन करनेसे कुमार्गपर भी चलनेसे पैर गड्ढेमें नहीं पड़ता (पतन नहीं होता)। ऐसा विचारकर सब सोच छोड़कर अवध जाकर अवधिभर उसका पालन करो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 607 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गुर पितु मातु स्वामि सिख पालें। चलेहुँ कुमग पग परहिं न खालें।।
English explanation
When one follows the guidance of guru, father, mother, and master, one's feet do not fall into a pit even while traveling a bad path.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु की | the guru's |
| पितु | पिता की | the father's |
| मातु | माता की | the mother's |
| स्वामि | स्वामी की | the master's |
| सिख | सीख | guidance |
| पालें | पालन करने पर | upon following |
| चलेहुँ | चलने पर भी | even when walking |
| कुमग | बुरी राह पर | on a bad path |
| पग | पाँव | feet |
| परहिं | पड़ते हैं | fall |
| न | नहीं | not |
| खालें | गड्ढे में | into a pit |
2 अस बिचारि सब सोच बिहाई। पालहु अवध अवधि भरि जाई।।
English explanation
Reflecting thus, abandon all anxiety, go to Ayodhya, and govern it for the appointed period.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| बिचारि | विचार करके | having considered |
| सब | सारी | all |
| सोच | चिंता | anxiety |
| बिहाई | छोड़कर | abandoning |
| पालहु | पालन करो; शासन करो | care for; govern |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya |
| अवधि | निर्धारित समय | the appointed period |
| भरि | भर; पूरे समय तक | throughout |
| जाई | जाकर | having gone there |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.315
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 607
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद,पादुका-प्रदान, भरतजीकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 607, 608
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।