अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मैं सिसु प्रभु सनेहँ प्रतिपाला। मंदरु मेरु कि लेहिं मराला।।
मूल पाठ
मैं सिसु प्रभु सनेहँ प्रतिपाला। मंदरु मेरु कि लेहिं मराला।।
गुर पितु मातु न जानउँ काहू। कहउँ सुभाउ नाथ पतिआहू।।
स्रोत अभिलेख 2.72 · पुस्तक पृ. 403, 403
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं तो प्रभु (आप) के स्नेहमें पला हुआ छोटा बच्चा हूँ! कहीं हंस भी मन्दराचल या सुमेरु पर्वतको उठा सकते हैं! हे नाथ! स्वभावसे ही कहता हूँ, आप विश्वास करें, मैं आपको छोड़कर गुरु, पिता, माता किसीको भी नहीं जानता॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 403 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मैं सिसु प्रभु सनेहँ प्रतिपाला। मंदरु मेरु कि लेहिं मराला।।
English explanation
Lord, I am a child nurtured by your affection. Can swans lift Mount Mandara and Mount Meru?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं | I |
| सिसु | बालक | a child |
| प्रभु | हे स्वामी | O lord |
| सनेहँ | स्नेह से | with affection |
| प्रतिपाला | पाला-पोसा गया | nurtured |
| मंदरु | मंदर पर्वत | Mount Mandara |
| मेरु | मेरु पर्वत | Mount Meru |
| कि | क्या | can; whether |
| लेहिं | उठा लें | take up; lift |
| मराला | हंस | swans |
2 गुर पितु मातु न जानउँ काहू। कहउँ सुभाउ नाथ पतिआहू।।
English explanation
I recognize no one else as teacher, father, or mother. Lord, I speak my genuine feelings; please believe me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु | teacher |
| पितु | पिता | father |
| मातु | माता | mother |
| न | नहीं | not |
| जानउँ | मैं जानता या मानता हूँ | I know or recognize |
| काहू | किसी को भी | anyone |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| सुभाउ | अपना सहज भाव | my genuine disposition |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| पतिआहू | विश्वास कीजिए | please believe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.72
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 403
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 403, 403
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।