अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दीन्हि मोहि सिख नीकि गोसाईं। लागि अगम अपनी कदराईं।।
मूल पाठ
दीन्हि मोहि सिख नीकि गोसाईं। लागि अगम अपनी कदराईं।।
नरबर धीर धरम धुर धारी। निगम नीति कहुँ ते अधिकारी।।
स्रोत अभिलेख 2.72 · पुस्तक पृ. 403, 403
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे स्वामी! आपने मुझे सीख तो बड़ी अच्छी दी है, पर मुझे अपनी कायरतासे वह मेरे लिये अगम (पहुँचके बाहर) लगी। शास्त्र और नीतिके तो वे ही श्रेष्ठ पुरुष अधिकारी हैं जो धीर हैं और धर्मकी धुरीको धारण करनेवाले हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 403 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दीन्हि मोहि सिख नीकि गोसाईं। लागि अगम अपनी कदराईं।।
English explanation
AI-draft interpretation: Master, you have given me good counsel, but my own timidity makes it seem beyond my capacity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दीन्हि | दी | gave |
| मोहि | मुझे | to me |
| सिख | सीख; उपदेश | counsel; instruction |
| नीकि | अच्छी | good |
| गोसाईं | हे स्वामी | O master |
| लागि | लगी; प्रतीत हुई | seemed |
| अगम | पहुँच या सामर्थ्य से बाहर | beyond reach or capacity |
| अपनी | अपनी ही | my own |
| कदराईं | कायरता के कारण | because of timidity |
2 नरबर धीर धरम धुर धारी। निगम नीति कहुँ ते अधिकारी।।
English explanation
Those who are foremost among men, steadfast, and bear the burden of righteousness are qualified to follow the principles taught by the Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नरबर | मनुष्यों में श्रेष्ठ | foremost among men |
| धीर | धैर्यवान; स्थिरबुद्धि | steadfast; composed |
| धरम | धर्म का | of righteousness |
| धुर | भार; दायित्व | burden; responsibility |
| धारी | धारण करने वाले | those who bear |
| निगम | वेदों की | of the Vedas |
| नीति | नीति; आचरण-विधि | principles of conduct |
| कहुँ | के लिए | for |
| ते | वे | they |
| अधिकारी | योग्य; पात्र | qualified; fit |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.72
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 403
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 403, 403
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।