अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनिगन गुर धुर धीर जनक से। ग्यान अनल मन कसें कनक से।।
मूल पाठ
मुनिगन गुर धुर धीर जनक से। ग्यान अनल मन कसें कनक से।।
जे बिरंचि निरलेप उपाए। पदुम पत्र जिमि जग जल जाए।।
स्रोत अभिलेख 2.317 · पुस्तक पृ. 609, 609
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनिगण, गुरु वसिष्ठजी और जनकजी-सरीखे धीरधुरन्धर जो अपने मनोंको ज्ञानरूपी अग्रिमें सोनेके समान कस चुके थे, जिनको ब्रह्माजीने निर्लेप ही रचा और जो जगत्रूपी जलमें कमलके पत्तेकी तरह ही (जगत्में रहते हुए भी जगत्से अनासक्त) पैदा हुए,॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 609 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुनिगन गुर धुर धीर जनक से। ग्यान अनल मन कसें कनक से।।
English explanation
AI draft: The sages, the preceptor, and foremost steadfast figures such as Janaka, whose minds were like gold tested in the fire of knowledge—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनिगन | मुनियों का समूह | the sages |
| गुर | गुरु | the preceptor |
| धुर | अग्रणी; प्रधान | foremost |
| धीर | धैर्यवान | steadfast |
| जनक | राजा जनक | King Janaka, Sita’s father |
| से | जैसे | such as |
| ग्यान | ज्ञान की | of knowledge |
| अनल | अग्नि में | in the fire |
| मन | मन | minds |
| कसें | परखे हुए | tested; proven |
| कनक | सोने | gold |
| से | के समान | like |
2 जे बिरंचि निरलेप उपाए। पदुम पत्र जिमि जग जल जाए।।
English explanation
AI draft: Whom Brahma had created unattached, like lotus leaves born in the waters of the world—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जिन्हें | whom |
| बिरंचि | ब्रह्मा ने | Brahma, the creator |
| निरलेप | निर्लिप्त; आसक्तिरहित | unattached; unaffected |
| उपाए | बनाया; उत्पन्न किया | created |
| पदुम | कमल के | lotus |
| पत्र | पत्ते | leaves |
| जिमि | जैसे | like |
| जग | संसाररूपी | the world as |
| जल | जल में | in water |
| जाए | जन्मे; उत्पन्न हुए | born; grown |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.317
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 609
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 609, 609
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।