अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुख प्रसन्न मन रंग न रोषू। सब कर सब बिधि करि परितोषू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउनका मुख प्रसन्न था, मनमें न आसक्ति थी, न रोष (द्वेष)। सबका सब तरहसे सन्तोष कराकर वे वनको चले। यह सुनकर सीता भी उनके साथ लग गयीं। श्रीरामके चरणोंकी अनुरागिणी वे किसी तरह न रहीं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 481 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मुख प्रसन्न मन रंग न रोषू। सब कर सब बिधि करि परितोषू।।
चले बिपिन सुनि सिय सँग लागी। रहइ न राम चरन अनुरागी।।
स्रोत अभिलेख 2.166 · पुस्तक पृ. 481, 481
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुख प्रसन्न मन रंग न रोषू। सब कर सब बिधि करि परितोषू।।
English explanation
His face was serene, with neither attachment nor anger in his mind. Rama satisfied everyone in every way before departing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुख | मुख; चेहरा | face |
| प्रसन्न | प्रसन्न; शांत और खिला हुआ | serene and cheerful |
| मन | मन में | in the mind |
| रंग | आसक्ति; अनुराग | attachment |
| न | नहीं | neither; not |
| रोषू | क्रोध | anger |
| सब | सबका | everyone's |
| कर | का | of |
| सब | हर | every |
| बिधि | प्रकार से | way; manner |
| करि | करके | having made; having brought about |
| परितोषू | संतोष; संतुष्टि | satisfaction |
2 चले बिपिन सुनि सिय सँग लागी। रहइ न राम चरन अनुरागी।।
English explanation
Hearing that Rama was leaving for the forest, Sita joined him; devoted to Rama's feet, she would not stay behind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े; जाने लगे | set out; were leaving |
| बिपिन | वन को | for the forest |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सिय | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama's wife |
| सँग | साथ | along with him |
| लागी | हो लीं; साथ चलने लगीं | joined him |
| रहइ | पीछे रहतीं | would stay behind |
| न | नहीं | not |
| राम | राम के | Rama's |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| अनुरागी | प्रेम रखने वाली | lovingly devoted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.166
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 481
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 481, 481
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।