अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मिलनि बिलोकि भरत रघुबर की। सुरगन सभय धकधकी धरकी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरतजी और श्रीरामचन्द्रजीके मिलनेका ढंग देखकर देवता भयभीत हो गये, उनकी धुकधुकी धड़कने लगी। देवगुरु बृहस्पतिजीने समझाया, तब कहीं वे मूर्ख चेते और फूल बरसाकर प्रशंसा करने लगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 544 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मिलनि बिलोकि भरत रघुबर की। सुरगन सभय धकधकी धरकी।।
समुझाए सुरगुरु जड़ जागे। बरषि प्रसून प्रसंसन लागे।।
स्रोत अभिलेख 2.241 · पुस्तक पृ. 544, 545
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मिलनि बिलोकि भरत रघुबर की। सुरगन सभय धकधकी धरकी।।
English explanation
Seeing Bharata and Rama meet, the gods grew fearful, their hearts pounding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिलनि | मिलन | meeting |
| बिलोकि | देखकर | seeing |
| भरत | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| रघुबर | श्रीराम | Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| की | का | of |
| सुरगन | देवताओं का समूह | the gods |
| सभय | भयभीत | fearful |
| धकधकी | हृदय की धकधक | heart-pounding |
| धरकी | धड़क उठी | began throbbing |
2 समुझाए सुरगुरु जड़ जागे। बरषि प्रसून प्रसंसन लागे।।
English explanation
Reassured by the gods’ preceptor, the stupefied gods came to their senses and began showering flowers and offering praise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझाए | समझाने पर | upon being reassured |
| सुरगुरु | देवताओं के गुरु बृहस्पति | Brihaspati, preceptor of the gods |
| जड़ | स्तब्ध; सुध-बुध खोए हुए | stupefied |
| जागे | सचेत हुए | came to their senses |
| बरषि | बरसाकर | showering |
| प्रसून | फूल | flowers |
| प्रसंसन | प्रशंसा करने | praising |
| लागे | लगे | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.241
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 544
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 544, 545
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।