अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अगम सनेह भरत रघुबर को। जहँ न जाइ मनु बिधि हरि हर को।।
मूल पाठ
अगम सनेह भरत रघुबर को। जहँ न जाइ मनु बिधि हरि हर को।।
सो मैं कुमति कहौं केहि भाँती। बाज सुराग कि गाँडर ताँती।।
स्रोत अभिलेख 2.241 · पुस्तक पृ. 544, 545
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजी और श्रीरघुनाथजीका प्रेम अगम्य है, जहाँ ब्रह्मा, विष्णु और महादेवका भी मन नहीं जा सकता। उस प्रेमको मैं कुबुद्धि किस प्रकार कहूँ! भला, गाँडरकी ताँतसे भी कहीं सुन्दर राग बज सकता है?॥ ३॥ [तालाबों और झीलोंमें एक तरहकी घास होती है, उसे गाँडर कहते हैं।]
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 544 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अगम सनेह भरत रघुबर को। जहँ न जाइ मनु बिधि हरि हर को।।
English explanation
The affection of Bharata and Rama is unfathomable; even the minds of Brahma, Vishnu, and Shiva cannot reach it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अगम | अगम; समझ की पहुँच से परे | unfathomable |
| सनेह | स्नेह | affection |
| भरत | भरत का | of Bharata |
| रघुबर | रघुवंश में श्रेष्ठ राम | Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| को | का | of |
| जहँ | जहाँ; जिस स्नेह तक | where; to which affection |
| न | नहीं | not |
| जाइ | पहुँचता है | reaches |
| मनु | मन | mind |
| बिधि | ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| हरि | विष्णु | Vishnu |
| हर | शिव | Shiva |
| को | का | of |
2 सो मैं कुमति कहौं केहि भाँती। बाज सुराग कि गाँडर ताँती।।
English explanation
How can I, with my limited understanding, describe that affection? Can a fine melody sound on a string made of gandar grass?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | उस स्नेह को | that affection |
| मैं | मैं | I |
| कुमति | अल्पबुद्धि वाला | of limited understanding |
| कहौं | कहूँ; वर्णन करूँ | might describe |
| केहि | किस | what |
| भाँती | प्रकार | manner |
| बाज | बज सकता है | can sound |
| सुराग | सुंदर राग | fine melody |
| कि | क्या | can; whether |
| गाँडर | गाँडर नाम की घास की | of gandar grass |
| ताँती | ताँत; वाद्य का तार | instrument string |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.241
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 544
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 544, 545
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।