अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मातु कुमत बढ़ई अघ मूला। तेहिं हमार हित कीन्ह बँसूला।।
मूल पाठ
मातु कुमत बढ़ई अघ मूला। तेहिं हमार हित कीन्ह बँसूला।।
कलि कुकाठ कर कीन्ह कुजंत्रू। गाड़ि अवधि पढ़ि कठिन कुमंत्रु।।
स्रोत अभिलेख 2.212 · पुस्तक पृ. 519, 520
भावार्थ
मूल पाठ के बादमाताका कुमत (बुरा विचार) पापोंका मूल बढ़ई है। उसने हमारे हितका बसूला बनाया। उससे कलहरूपी कुकाठका कुयन्त्र बनाया और चौदह वर्षकी अवधिरूपी कठिन कुमन्त्र पढ़कर उस यन्त्रको गाड़ दिया। [यहाँ माताका कुविचार बढ़ई है, भरतको राज्य बसूला है, रामका वनवास कुयन्त्र है और चौदह वर्षकी अवधि कुमन्त्र है]॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 519 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मातु कुमत बढ़ई अघ मूला। तेहिं हमार हित कीन्ह बँसूला।।
English explanation
My mother's misguided judgment, rooted in sin, became a carpenter; it made my supposed welfare its adze.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | माता की | my mother's |
| कुमत | कुबुद्धि | misguided judgment |
| बढ़ई | बढ़ई | a carpenter |
| अघ | पाप | sin |
| मूला | जिसकी जड़ है | having as its root |
| तेहिं | उसने | it |
| हमार | मेरा | my |
| हित | हित | supposed welfare |
| कीन्ह | बना लिया | made into |
| बँसूला | बसूला, लकड़ी छीलने का औजार | an adze, a woodworking tool |
2 कलि कुकाठ कर कीन्ह कुजंत्रू। गाड़ि अवधि पढ़ि कठिन कुमंत्रु।।
English explanation
It made a sinister device from the bad wood of discord and, reciting a harsh evil spell, drove in the term of exile like a peg.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कलि | कलह | discord |
| कुकाठ | खराब लकड़ी | bad wood |
| कर | का | of; from |
| कीन्ह | बनाया | made |
| कुजंत्रू | कुत्सित यंत्र | a sinister device |
| गाड़ि | गाड़कर | having driven in |
| अवधि | वनवास की निश्चित अवधि | the fixed term of exile |
| पढ़ि | पढ़कर | having recited |
| कठिन | कठोर | harsh |
| कुमंत्रु | बुरा मंत्र | an evil spell |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.212
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 519
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 519, 520
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।