अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मागी नाव न केवटु आना। कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना।।
मूल पाठ
मागी नाव न केवटु आना। कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना।।
चरन कमल रज कहुँ सबु कहई। मानुष करनि मूरि कछु अहई।।
स्रोत अभिलेख 2.1 · पुस्तक पृ. 426, 426
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामने केवटसे नाव माँगी, पर वह लाता नहीं। वह कहने लगा—मैंने तुम्हारा मर्म (भेद) जान लिया। तुम्हारे चरणकमलोंकी धूलके लिये सब लोग कहते हैं कि वह मनुष्य बना देनेवाली कोई जड़ी है,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 426 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मागी नाव न केवटु आना। कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना।।
English explanation
Rama asked for a boat, but the boatman did not bring it. He says, ‘I have discovered your secret.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मागी | माँगी | asked for |
| नाव | नाव | a boat |
| न | नहीं | not |
| केवटु | केवट; नाविक | the boatman |
| आना | लाया | brought |
| कहइ | कहता है | says |
| तुम्हार | तुम्हारा | your |
| मरमु | मर्म; छिपा रहस्य | secret; hidden power |
| मैं | मैं | I |
| जाना | जान गया हूँ | have come to know |
2 चरन कमल रज कहुँ सबु कहई। मानुष करनि मूरि कछु अहई।।
English explanation
Everyone says that the dust of your lotus feet is some herb that turns things into human beings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरन | चरण | feet |
| कमल | कमल जैसे | lotus-like |
| रज | धूल | dust |
| कहुँ | के विषय में; को | concerning; of |
| सबु | सब लोग | everyone |
| कहई | कहते हैं | say |
| मानुष | मनुष्य | a human being |
| करनि | बना देने वाली | that makes or transforms into |
| मूरि | जड़ी; औषधीय मूल | herb; medicinal root |
| कछु | कोई | some |
| अहई | है | is |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 426
- सहायक विषय
- केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 426, 426
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