अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
छुअत सिला भइ नारि सुहाई। पाहन तें न काठ कठिनाई।।
मूल पाठ
छुअत सिला भइ नारि सुहाई। पाहन तें न काठ कठिनाई।।
तरनिउ मुनि घरिनि होइ जाई। बाट परइ मोरि नाव उड़ाई।।
स्रोत अभिलेख 2.1 · पुस्तक पृ. 426, 426
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिसके छूते ही पत्थरकी शिला सुन्दरी स्त्री हो गयी [मेरी नाव तो काठकी है]। काठ पत्थरसे कठोर तो होता नहीं। मेरी नाव भी मुनिकी स्त्री हो जायगी और इस प्रकार मेरी नाव उड़ जायगी, मैं लुट जाऊँगा [अथवा रास्ता रुक जायगा जिससे आप पार न हो सकेंगे और मेरी रोजी मारी जायगी] (मेरी कमाने-खानेकी राह ही मारी जायगी)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 426 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 छुअत सिला भइ नारि सुहाई। पाहन तें न काठ कठिनाई।।
English explanation
At the touch of that dust, a stone became a beautiful woman; wood is certainly not harder than stone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छुअत | छूते ही | upon touching |
| सिला | शिला; पत्थर | a stone |
| भइ | बन गई | became |
| नारि | स्त्री | a woman |
| सुहाई | सुंदर | beautiful |
| पाहन | पत्थर | stone |
| तें | से | than |
| न | नहीं | not |
| काठ | लकड़ी | wood |
| कठिनाई | अधिक कठोर | harder |
2 तरनिउ मुनि घरिनि होइ जाई। बाट परइ मोरि नाव उड़ाई।।
English explanation
The boat too will become a sage’s wife; with my boat gone, my livelihood will be ruined.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तरनिउ | नाव भी | the boat too |
| मुनि | मुनि की | a sage’s |
| घरिनि | पत्नी | wife |
| होइ | हो | become |
| जाई | जाएगी | will |
| बाट | बरबादी; चौपट दशा | ruin |
| परइ | पड़ जाएगी | will befall |
| मोरि | मेरी | my |
| नाव | नाव | boat |
| उड़ाई | हाथ से निकल जाने पर | with it lost |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 426
- सहायक विषय
- केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 426, 426
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।