अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
महीं सकल अनरथ कर मूला। सो सुनि समुझि सहिउँ सब सूला।।
मूल पाठ
महीं सकल अनरथ कर मूला। सो सुनि समुझि सहिउँ सब सूला।।
सुनि बन गवनु कीन्ह रघुनाथा। करि मुनि बेष लखन सिय साथा।।
बिनु पानहिन्ह पयादेहि पाएँ। संकरु साखि रहेउँ एहि घाएँ।।
बहुरि निहार निषाद सनेहू। कुलिस कठिन उर भयउ न बेहू।।
स्रोत अभिलेख 2.262 · पुस्तक पृ. 562, 562
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं ही इन सारे अनर्थोंका मूल हूँ, यह सुन और समझकर मैंने सब दु:ख सहा है। श्रीरघुनाथजी लक्ष्मण और सीताजीके साथ मुनियोंका-सा वेष धारणकर बिना जूते पहने पाँव-प्यादे (पैदल) ही वनको चले गये, यह सुनकर, शङ्करजी साक्षी हैं, इस घावसे भी मैं जीता रह गया (यह सुनते ही मेरे प्राण नहीं निकल गये)! फिर निषादराजका प्रेम देखकर भी इस वज्रसे भी कठोर हृदयमें छेद नहीं हुआ (यह फटा नहीं)॥ २-३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 562 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 महीं सकल अनरथ कर मूला। सो सुनि समुझि सहिउँ सब सूला।।
English explanation
I myself am the root of all these calamities; hearing and understanding this, I endured every pang.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महीं | मैं ही | I myself |
| सकल | सभी | all |
| अनरथ | अनर्थों; विपत्तियों | calamities |
| कर | का | of |
| मूला | मूल; जड़ | root; cause |
| सो | यह बात | this |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| समुझि | समझकर | having understood |
| सहिउँ | मैंने सहा | I endured |
| सब | सारी | all |
| सूला | पीड़ाएँ | pangs; sufferings |
2 सुनि बन गवनु कीन्ह रघुनाथा। करि मुनि बेष लखन सिय साथा।।
English explanation
I heard that Rama departed for the forest with Lakshmana and Sita, dressed as an ascetic.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर; मैंने सुना कि | having heard; I heard that |
| बन | वन को | to the forest |
| गवनु | प्रस्थान | departure |
| कीन्ह | किया | made |
| रघुनाथा | रघुकुल के स्वामी श्रीराम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| करि | धारण करके | having assumed |
| मुनि | मुनि का | an ascetic’s |
| बेष | वेश | garb |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| सिय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| साथा | साथ में | along with |
3 बिनु पानहिन्ह पयादेहि पाएँ। संकरु साखि रहेउँ एहि घाएँ।।
English explanation
They went on foot without shoes; Shiva is witness that I remained alive even after this blow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| पानहिन्ह | जूतों के | shoes |
| पयादेहि | पैदल | on foot |
| पाएँ | पाँवों से | on their feet |
| संकरु | भगवान शिव | Shiva |
| साखि | साक्षी हैं | is witness |
| रहेउँ | मैं जीवित रहा | I remained alive |
| एहि | इस | this |
| घाएँ | आघात पर भी | even under this blow |
4 बहुरि निहार निषाद सनेहू। कुलिस कठिन उर भयउ न बेहू।।
English explanation
Then, even on seeing the Nishada chief’s love, my thunderbolt-hard heart did not split in two.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | then; again |
| निहार | देखकर | on seeing |
| निषाद | निषादराज गुह का | of Guha, the Nishada chief |
| सनेहू | प्रेम | love |
| कुलिस | वज्र के समान | like a thunderbolt |
| कठिन | कठोर | hard |
| उर | हृदय | heart |
| भयउ | हुआ | became |
| न | नहीं | not |
| बेहू | दो टुकड़े | split in two |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.262
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 562
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 562, 562
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।