अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भूपति मरन पेम पनु राखी। जननी कुमति जगतु सबु साखी।।
मूल पाठ
भूपति मरन पेम पनु राखी। जननी कुमति जगतु सबु साखी।।
देखि न जाहि बिकल महतारी। जरहिं दुसह जर पुर नर नारी।।
स्रोत अभिलेख 2.262 · पुस्तक पृ. 562, 562
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रेमके प्रणको निबाहकर महाराज (पिताजी) का मरना और माताकी कुबुद्धि, दोनोंका सारा संसार साक्षी है। माताएँ व्याकुल हैं, वे देखी नहीं जातीं। अवधपुरीके नर-नारी दु:सह तापसे जल रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 562 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भूपति मरन पेम पनु राखी। जननी कुमति जगतु सबु साखी।।
English explanation
King Dasharatha upheld his pledge of love by dying; the whole world witnesses mother Kaikeyi’s misguided thinking.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूपति | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| मरन | मृत्यु द्वारा; प्राण देकर | through death; by giving up his life |
| पेम | प्रेम का | of love |
| पनु | प्रण; प्रतिज्ञा | pledge; vow |
| राखी | निभाया; बनाए रखा | upheld; kept |
| जननी | माता कैकेयी | mother Kaikeyi |
| कुमति | खोटी बुद्धि | misguided thinking |
| जगतु | संसार | the world |
| सबु | सारा | the whole |
| साखी | साक्षी है | is witness |
2 देखि न जाहि बिकल महतारी। जरहिं दुसह जर पुर नर नारी।।
English explanation
The distraught mothers are unbearable to behold; the city’s men and women burn with unbearable anguish.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखी | beheld |
| न | नहीं | not |
| जाहि | जा सकतीं | can be |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| महतारी | माताएँ | mothers |
| जरहिं | जलते हैं | burn |
| दुसह | असह्य | unbearable |
| जर | संताप में | with anguish |
| पुर | नगर के | of the city |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.262
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 562
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 562, 562
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।