अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब सबु आँखिन्ह देखेउँ आई। जिअत जीव जड़ सबइ सहाई।।
मूल पाठ
अब सबु आँखिन्ह देखेउँ आई। जिअत जीव जड़ सबइ सहाई।।
जिन्हहि निरखि मग साँपिनि बीछी। तजहिं बिषम बिषु तामस तीछी।।
स्रोत अभिलेख 2.262 · पुस्तक पृ. 562, 562
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब यहाँ आकर सब आँखों देख लिया। यह जड़ जीव जीता रहकर सभी सहावेगा। जिनको देखकर रास्तेकी साँपिनी और बीछी भी अपने भयानक विष और तीव्र क्रोधको त्याग देती हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 562 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अब सबु आँखिन्ह देखेउँ आई। जिअत जीव जड़ सबइ सहाई।।
English explanation
Now, having come here, I have seen everything with my own eyes; this unfeeling creature endures everything while it remains alive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| सबु | सब कुछ | everything |
| आँखिन्ह | अपनी आँखों से | with my own eyes |
| देखेउँ | मैंने देखा | I saw |
| आई | आकर | having come |
| जिअत | जीवित रहते | while living |
| जीव | जीव; यह प्राणी | creature; living being |
| जड़ | जड़; संवेदनहीन | unfeeling; insensible |
| सबइ | सब कुछ | everything |
| सहाई | सह लेता है | endures |
2 जिन्हहि निरखि मग साँपिनि बीछी। तजहिं बिषम बिषु तामस तीछी।।
English explanation
At the sight of whom along the road, even female snakes and scorpions abandon their dreadful venom and fierce, malignant nature—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्हहि | जिन्हें; राम, लक्ष्मण और सीता को | whom; Rama, Lakshmana, and Sita |
| निरखि | देखकर | on seeing |
| मग | मार्ग में | on the road |
| साँपिनि | साँपिनियाँ | female snakes |
| बीछी | बिच्छू | scorpions |
| तजहिं | छोड़ देते हैं | abandon |
| बिषम | भयंकर | dreadful |
| बिषु | विष | venom |
| तामस | तामसी; हिंसक प्रकृति | malignant, violent nature |
| तीछी | तीखी; उग्र | fierce; intense |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.262
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 562
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 562, 562
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।