अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मनहीं मन मागहिं बरु एहू। सीय राम पद पदुम सनेहू।।
मूल पाठ
मनहीं मन मागहिं बरु एहू। सीय राम पद पदुम सनेहू।।
मिलहिं किरात कोल बनबासी। बैखानस बटु जती उदासी।।
स्रोत अभिलेख 2.224 · पुस्तक पृ. 529, 530
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर मन-ही-मन यह वरदान माँगते हैं कि श्रीसीतारामजीके चरणकमलोंमें प्रेम हो। मार्गमें भील, कोल आदि वनवासी तथा वानप्रस्थ, ब्रह्मचारी, संन्यासी और विरक्त मिलते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 530 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मनहीं मन मागहिं बरु एहू। सीय राम पद पदुम सनेहू।।
English explanation
Inwardly they ask for this boon: love for the lotus feet of Sita and Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनहीं | मन में ही | inwardly alone |
| मन | मन; मन ही मन के प्रयोग का अंग | mind; completing ‘inwardly’ |
| मागहिं | माँगते हैं | ask for |
| बरु | वरदान | a boon |
| एहू | यही | this very |
| सीय | सीता के | of Sita |
| राम | राम के | of Rama |
| पद | चरण | feet |
| पदुम | कमल; कमल-समान | lotuses; lotus-like |
| सनेहू | प्रेम | love |
2 मिलहिं किरात कोल बनबासी। बैखानस बटु जती उदासी।।
English explanation
Along the way they meet Kiratas, Kols, forest dwellers, forest hermits, celibate students, ascetics, and renunciants.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिलहिं | मिलते हैं | meet; encounter |
| किरात | किरात वनवासी समुदाय के लोग | people of the Kirata forest community |
| कोल | कोल वनवासी समुदाय के लोग | people of the Kol forest community |
| बनबासी | वन में रहने वाले | forest dwellers |
| बैखानस | वानप्रस्थ वनवासी तपस्वी | forest-dwelling hermits |
| बटु | ब्रह्मचारी विद्यार्थी | celibate religious students |
| जती | संयमी साधु; यति | self-restrained ascetics |
| उदासी | संसार से विरक्त साधु | renunciants detached from worldly life |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.224
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 530
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 529, 530
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