अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज गुन सहित राम गुन गाथा। सुनत जाहिं सुमिरत रघुनाथा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[इस प्रकार] अपने गुणोंसहित श्रीरामचन्द्रजीके गुणोंकी कथा सुनते और श्रीरघुनाथजीको स्मरण करते हुए भरतजी चले जा रहे हैं। वे तीर्थ देखकर स्नान और मुनियोंके आश्रम तथा देवताओंके मन्दिर देखकर प्रणाम करते हैं,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 529 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
निज गुन सहित राम गुन गाथा। सुनत जाहिं सुमिरत रघुनाथा।।
तीरथ मुनि आश्रम सुरधामा। निरखि निमज्जहिं करहिं प्रनामा।।
स्रोत अभिलेख 2.224 · पुस्तक पृ. 529, 530
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निज गुन सहित राम गुन गाथा। सुनत जाहिं सुमिरत रघुनाथा।।
English explanation
Bharata proceeds, hearing accounts of Rama’s virtues that also include praise of his own qualities, while remembering Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने; यहाँ भरत के | his own; here, Bharata’s |
| गुन | गुणों के वर्णन | accounts of virtues |
| सहित | के साथ | together with |
| राम | श्रीराम के | of Rama |
| गुन | गुणों की | of the virtues |
| गाथा | गाथा; गुणों का वर्णन | narrative of praise |
| सुनत | सुनते हुए | while listening |
| जाहिं | चले जाते हैं | proceeds onward |
| सुमिरत | स्मरण करते हुए | while remembering |
| रघुनाथा | रघुकुल के स्वामी राम को | Rama, lord of Raghu’s lineage |
2 तीरथ मुनि आश्रम सुरधामा। निरखि निमज्जहिं करहिं प्रनामा।।
English explanation
Seeing pilgrimage sites, sages’ hermitages, and temples, they bathe in the sacred waters and offer salutations.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तीरथ | तीर्थस्थल | pilgrimage sites |
| मुनि | मुनियों के | of sages |
| आश्रम | आश्रम | hermitages |
| सुरधामा | देवताओं के स्थान; मंदिर | abodes of deities; temples |
| निरखि | देखकर | having seen |
| निमज्जहिं | पवित्र जल में डुबकी लगाते हैं | take ritual dips in sacred waters |
| करहिं | करते हैं | offer; perform |
| प्रनामा | प्रणाम | salutations |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.224
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 529
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 529, 530
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।