अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मज्जनु कीन्ह पंथ श्रम गयऊ। सुचि जलु पिअत मुदित मन भयऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइसके बाद सबने स्नान किया, जिससे मार्गका सारा श्रम (थकावट) दूर हो गया और पवित्र जल पीते ही मन प्रसन्न हो गया। जिनके स्मरणमात्रसे [बार-बार जन्मने और मरनेका] महान् श्रम मिट जाता है, उनको 'श्रम होना—यह केवल लौकिक व्यवहार (नरलीला) है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 415 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मज्जनु कीन्ह पंथ श्रम गयऊ। सुचि जलु पिअत मुदित मन भयऊ।।
सुमिरत जाहि मिटइ श्रम भारू। तेहि श्रम यह लौकिक ब्यवहारू।।
स्रोत अभिलेख 2.87 · पुस्तक पृ. 415, 416
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मज्जनु कीन्ह पंथ श्रम गयऊ। सुचि जलु पिअत मुदित मन भयऊ।।
English explanation
They bathed, and the weariness of the journey passed away; drinking the pure water, their hearts became joyful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मज्जनु | स्नान | bathing |
| कीन्ह | किया | performed |
| पंथ | मार्ग, यात्रा की | of the journey |
| श्रम | थकान | weariness |
| गयऊ | दूर हो गई | passed away |
| सुचि | शुद्ध, पवित्र | pure; sacred |
| जलु | जल | water |
| पिअत | पीते ही | upon drinking |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| मन | मन | heart; mind |
| भयऊ | हो गया | became |
2 सुमिरत जाहि मिटइ श्रम भारू। तेहि श्रम यह लौकिक ब्यवहारू।।
English explanation
Remembering Rama dispels great weariness; his own weariness here is an instance of ordinary human conduct.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमिरत | स्मरण करने से | by remembering |
| जाहि | जिनका, अर्थात राम का | whom, namely Rama |
| मिटइ | मिट जाती है | disappears |
| श्रम | थकान | weariness |
| भारू | भारी, बहुत बड़ी | heavy; great |
| तेहि | उन्हीं राम को | for that same Rama |
| श्रम | थकान होना | experiencing weariness |
| यह | यह | this |
| लौकिक | सांसारिक, सामान्य मानवीय | worldly; ordinary human |
| ब्यवहारू | व्यवहार, आचरण | conduct; behavior |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.87
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 415
- सहायक विषय
- श्रीरामका शृङ्गवेरपुर पहुँचना, निषादके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 415, 416
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।