अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भावी बस प्रतीति उर आई। पूँछ रानि पुनि सपथ देवाई।।
मूल पाठ
भावी बस प्रतीति उर आई। पूँछ रानि पुनि सपथ देवाई।।
का पूछहुँ तुम्ह अबहुँ न जाना। निज हित अनहित पसु पहिचाना।।
स्रोत अभिलेख 2.19 · पुस्तक पृ. 359, 359
भावार्थ
मूल पाठ के बादहोनहारवश कैकेयीके मनमें विश्वास हो गया। रानी फिर सौगन्ध दिलाकर पूछने लगी। [मन्थरा बोली—] क्या पूछती हो? अरे, तुमने अब भी नहीं समझा ? अपने भले-बुरेको (अथवा मित्र- शत्रुको) तो पशु भी पहचान लेते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 359 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भावी बस प्रतीति उर आई। पूँछ रानि पुनि सपथ देवाई।।
English explanation
AI draft: Under the sway of what was destined to happen, belief arose in the queen’s heart. She questioned Manthara again and made her swear an oath.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भावी | होनहार; जो होना नियत है | what is destined to happen |
| बस | के वश में | under the sway of |
| प्रतीति | विश्वास | belief |
| उर | हृदय में | in the heart |
| आई | आ गई | arose |
| पूँछ | पूछकर | having asked |
| रानि | रानी कैकेयी ने | Queen Kaikeyi |
| पुनि | फिर | again |
| सपथ | शपथ | an oath |
| देवाई | दिलवाई | made her swear |
2 का पूछहुँ तुम्ह अबहुँ न जाना। निज हित अनहित पसु पहिचाना।।
English explanation
Why do you ask? Have you still not understood? Even an animal recognizes what benefits or harms it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| का | क्या; क्यों | what; why |
| पूछहुँ | पूछती हो | do you ask |
| तुम्ह | तुम, कैकेयी | you, Kaikeyi |
| अबहुँ | अभी तक भी | even now; still |
| न | नहीं | not |
| जाना | समझा | understood |
| निज | अपना | one’s own |
| हित | भलाई | benefit |
| अनहित | बुराई; हानि | harm |
| पसु | पशु भी | even an animal |
| पहिचाना | पहचान लेता है | recognizes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 359
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 359, 359
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।