अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भयउ पाखु दिन सजत समाजू। तुम्ह पाई सुधि मोहि सन आजू।।
मूल पाठ
भयउ पाखु दिन सजत समाजू। तुम्ह पाई सुधि मोहि सन आजू।।
खाइअ पहिरिअ राज तुम्हारें। सत्य कहें नहिं दोषु हमारें।।
स्रोत अभिलेख 2.19 · पुस्तक पृ. 359, 359
भावार्थ
मूल पाठ के बादपूरा पखवाड़ा बीत गया सामान सजते और तुमने खबर पायी है आज मुझसे! मैं तुम्हारे राजमें खाती-पहनती हूँ, इसलिये सच कहनेमें मुझे कोई दोष नहीं है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 359 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भयउ पाखु दिन सजत समाजू। तुम्ह पाई सुधि मोहि सन आजू।।
English explanation
The coronation preparations have been going on for a fortnight, yet you learned of them from me only today.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हो गया | has elapsed |
| पाखु | एक पखवाड़ा | a fortnight |
| दिन | दिनों का समय | days |
| सजत | तैयार होते | being prepared |
| समाजू | अभिषेक का आयोजन और सामग्री | the coronation arrangements |
| तुम्ह | तुमने | you |
| पाई | पाई | received |
| सुधि | खबर | news |
| मोहि | मुझ | me |
| सन | से | from |
| आजू | आज | today |
2 खाइअ पहिरिअ राज तुम्हारें। सत्य कहें नहिं दोषु हमारें।।
English explanation
We receive our food and clothing under your rule; there is no fault on our part in telling the truth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खाइअ | हम खाते हैं | we eat; are fed |
| पहिरिअ | हम पहनते हैं | we wear clothes; are clothed |
| राज | राज में | under the rule |
| तुम्हारें | तुम्हारे | your |
| सत्य | सच | the truth |
| कहें | कहने पर | in saying |
| नहिं | नहीं | not |
| दोषु | दोष | fault |
| हमारें | हमारा; हमारी ओर से | ours; on our part |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 359
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 359, 359
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।