अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत हृदयँ सिय राम निवासू। तहँ कि तिमिर जहँ तरनि प्रकासू।।
मूल पाठ
भरत हृदयँ सिय राम निवासू। तहँ कि तिमिर जहँ तरनि प्रकासू।।
अस कहि सारद गइ बिधि लोका। बिबुध बिकल निसि मानहुँ कोका।।
स्रोत अभिलेख 2.295 · पुस्तक पृ. 590, 591
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजीके हृदयमें श्रीसीतारामजीका निवास है। जहाँ सूर्यका प्रकाश है, वहाँ कहीं अँधेरा रह सकता है? ऐसा कहकर सरस्वतीजी ब्रह्मलोकको चली गयीं। देवता ऐसे व्याकुल हुए जैसे रात्रिमें चकवा व्याकुल होता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 590 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भरत हृदयँ सिय राम निवासू। तहँ कि तिमिर जहँ तरनि प्रकासू।।
English explanation
Sita and Rama dwell in Bharata’s heart. Can darkness exist where the sun shines?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत के | Bharata’s |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| सिय | सीता का | of Sita |
| राम | राम का | of Rama |
| निवासू | निवास है | is the dwelling |
| तहँ | वहाँ | there |
| कि | क्या | can there be? |
| तिमिर | अंधकार | darkness |
| जहँ | जहाँ | where |
| तरनि | सूर्य का | the sun’s |
| प्रकासू | प्रकाश है | light shines |
2 अस कहि सारद गइ बिधि लोका। बिबुध बिकल निसि मानहुँ कोका।।
English explanation
Saying this, Saraswati departed for Brahma’s realm. The gods were distraught like chakravaka birds at night.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| सारद | सरस्वती | Saraswati |
| गइ | चली गईं | departed |
| बिधि | ब्रह्मा के | Brahma’s |
| लोका | लोक को | to the realm |
| बिबुध | देवता | the gods |
| बिकल | व्याकुल हुए | became distraught |
| निसि | रात में | at night |
| मानहुँ | मानो | as though |
| कोका | चकवे | chakravaka birds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.295
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 590
- सहायक विषय
- जनक-वसिष्ठादि-संवाद, इन्द्रकी चिन्ता, सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 590, 591
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।