अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिधि हरि हर माया बड़ि भारी। सोउ न भरत मति सकइ निहारी।।
मूल पाठ
बिधि हरि हर माया बड़ि भारी। सोउ न भरत मति सकइ निहारी।।
सो मति मोहि कहत करु भोरी। चंदिनि कर कि चंडकर चोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.295 · पुस्तक पृ. 590, 591
भावार्थ
मूल पाठ के बादब्रह्मा, विष्णु और महेशकी माया बड़ी प्रबल है! किन्तु वह भी भरतजीकी बुद्धिकी ओर ताक नहीं सकती। उस बुद्धिको, तुम मुझसे कह रहे हो कि भोली कर दो (भुलावेमें डाल दो)! अरे! चाँदनी कहीं प्रचण्ड किरणवाले सूर्यको चुरा सकती है?॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 590 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिधि हरि हर माया बड़ि भारी। सोउ न भरत मति सकइ निहारी।।
English explanation
The illusion-power of Brahma, Vishnu, and Shiva is exceedingly mighty; even it cannot cast its gaze upon Bharata’s mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिधि | ब्रह्मा की | of Brahma, the creator |
| हरि | विष्णु की | of Vishnu |
| हर | शिव की | of Shiva |
| माया | माया | power of illusion |
| बड़ि | बहुत | very |
| भारी | प्रबल | mighty |
| सोउ | वह भी | even that |
| न | नहीं | not |
| भरत | भरत की | Bharata’s |
| मति | बुद्धि को | mind |
| सकइ | सकती | can |
| निहारी | देख | look upon |
2 सो मति मोहि कहत करु भोरी। चंदिनि कर कि चंडकर चोरी।।
English explanation
You tell me to make that very mind naive and deluded! Can moonlight steal the sun’s radiance?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | उस | that very |
| मति | बुद्धि को | mind |
| मोहि | मुझसे | to me |
| कहत | तुम कहते हो | you say |
| करु | बना दो | make |
| भोरी | भोली, भ्रमित | naive, deluded |
| चंदिनि | चाँदनी | moonlight |
| कर | कर सकती है | can perform |
| कि | क्या | can it? |
| चंडकर | सूर्य की | of the sun’s radiance |
| चोरी | चोरी | theft |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.295
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 590
- सहायक विषय
- जनक-वसिष्ठादि-संवाद, इन्द्रकी चिन्ता, सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 590, 591
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।