अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत सुभाउ न सुगम निगमहूँ। लघु मति चापलता कबि छमहूँ।।
मूल पाठ
भरत सुभाउ न सुगम निगमहूँ। लघु मति चापलता कबि छमहूँ।।
कहत सुनत सति भाउ भरत को। सीय राम पद होइ न रत को।।
स्रोत अभिलेख 2.304 · पुस्तक पृ. 598, 599
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजीके स्वभावका वर्णन वेदोंके लिये भी सुगम नहीं है। [अत:] मेरी तुच्छ बुद्धिकी चञ्चलताको कविलोग क्षमा करें! भरतजीके सद्भावको कहते-सुनते कौन मनुष्य श्रीसीतारामजीके चरणोंमें अनुरक्त न हो जायगा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 598 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भरत सुभाउ न सुगम निगमहूँ। लघु मति चापलता कबि छमहूँ।।
English explanation
AI draft: Bharata’s nature is not easy even for the Vedas to comprehend. May the poets forgive the audacity of my limited understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत का; राम के भाई का | of Bharata, Rama’s brother |
| सुभाउ | स्वभाव | nature |
| न | नहीं | not |
| सुगम | सहज समझने योग्य | easy to comprehend |
| निगमहूँ | वेदों के लिए भी | even for the Vedas |
| लघु | छोटी, सीमित | small, limited |
| मति | बुद्धि | understanding |
| चापलता | चपलता; वर्णन करने का दुस्साहस | audacity in attempting the description |
| कबि | कविजन | poets |
| छमहूँ | क्षमा करें | may they forgive |
2 कहत सुनत सति भाउ भरत को। सीय राम पद होइ न रत को।।
English explanation
Who, in telling or hearing of Bharata’s sincere devotion, would not become attached to Sita’s and Rama’s feet?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | while telling |
| सुनत | सुनते हुए | while hearing |
| सति | सच्चा | true, sincere |
| भाउ | भाव; भक्तिभाव | feeling; devotion |
| भरत | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| को | का | of |
| सीय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| राम | राम | Rama |
| पद | चरणों में | at the feet |
| होइ | हो जाता है | becomes |
| न | नहीं | not |
| रत | अनुरक्त | devoted, attached |
| को | कौन | who |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.304
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 598
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 598, 599
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।