अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत सील गुर सचिव समाजू। सकुच सनेह बिबस रघुराजू।।
मूल पाठ
भरत सील गुर सचिव समाजू। सकुच सनेह बिबस रघुराजू।।
प्रभु करि कृपा पाँवरीं दीन्हीं। सादर भरत सीस धरि लीन्हीं।।
स्रोत अभिलेख 2.316 · पुस्तक पृ. 608, 609
भावार्थ
मूल पाठ के बादइधर तो भरतजीका शील (प्रेम) और उधर गुरुजनों, मन्त्रियों तथा समाजकी उपस्थिति! यह देखकर श्रीरघुनाथजी संकोच तथा स्नेहके विशेष वशीभूत हो गये। (अर्थात् भरतजीके प्रेमवश उन्हें पाँवरी देना चाहते हैं, किन्तु साथ ही गुरु आदिका संकोच भी होता है।) आखिर [भरतजीके प्रेमवश] प्रभु श्रीरामचन्द्रजीने कृपाकर खड़ाऊँ दे दीं और भरतजीने उन्हें आदरपूर्वक सिरपर धारण कर लिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 608 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भरत सील गुर सचिव समाजू। सकुच सनेह बिबस रघुराजू।।
English explanation
Before Bharata’s noble character and the assembly of the preceptor and ministers, Rama, lord of Raghu’s line, was overcome by affectionate regard and hesitation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| सील | सुशील स्वभाव | noble character |
| गुर | गुरु | the preceptor |
| सचिव | मंत्री | ministers |
| समाजू | सभा | assembly |
| सकुच | संकोच; लिहाज | hesitation; regard |
| सनेह | प्रेम | affection |
| बिबस | विवश; वश में हुए | overcome; swayed |
| रघुराजू | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
2 प्रभु करि कृपा पाँवरीं दीन्हीं। सादर भरत सीस धरि लीन्हीं।।
English explanation
Lord Rama graciously gave his sandals, and Bharata reverently placed them upon his head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| करि | करके | having shown |
| कृपा | कृपा | kindness |
| पाँवरीं | खड़ाऊँ | wooden sandals |
| दीन्हीं | दे दीं | gave |
| सादर | आदरपूर्वक | reverently |
| भरत | राम के भाई भरत ने | Bharata, Rama’s brother |
| सीस | सिर पर | upon his head |
| धरि | रखकर | having placed |
| लीन्हीं | धारण कर लीं | accepted and held |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.316
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 608
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद,पादुका-प्रदान, भरतजीकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 608, 609
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।